गाडरीढाना के सरकारी प्राथमिक स्कूल में छात्रों की संख्या बेहद कम
शिक्षा
17-Aug-26
महापौर ने किया ढीमराढाना और गाडरीढाना स्कूल का औचक्क निरीक्षण

छिंदवाड़ा
नगर पालिक निगम क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक शाला ढीमराढाना एवं गाडरीढाना के औचक निरीक्षण के दौरान महापौर विक्रम सिंह अहके ने बच्चों से संवाद किया और स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण की तस्वीर का सबसे अहम पहलू यह सामने आया कि संबंधित स्कूल में बहुत कम बच्चे अध्ययनरत हैं।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
महापौर ने कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों से उनकी पढ़ाई, विषयों की समझ और स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल किए। बच्चों की शैक्षणिक स्थिति जानने के साथ उन्होंने शिक्षकों से भी स्कूल में संचालित गतिविधियों और विद्यार्थियों की प्रगति की जानकारी ली। स्कूल में विद्यार्थियों की कम संख्या का यह आंकड़ा कई बड़े सवाल भी खड़े करता है। जब प्राथमिक स्कूल में पांच कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों की संख्या कम रह गई है, तो क्या शिक्षा विभाग ने कभी इसकी गंभीरता से समीक्षा की? क्या स्कूल में पदस्थ शिक्षकों, संसाधनों और सरकारी खर्च के अनुपात में विद्यार्थियों की संख्या का मूल्यांकन किया गया है? आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि आसपास के क्षेत्र के अधिकांश बच्चे इस स्कूल से दूर हो गए?
आखिर विद्यार्थियों की संख्या कम क्यों?
महापौर का निरीक्षण और बच्चों से सीधा संवाद निश्चित रूप से सकारात्मक पहल है, लेकिन सिर्फ औचक निरीक्षण और बच्चों से सवाल-जवाब से शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर नहीं बदलेगी। जरूरत इस बात की है कि शिक्षा विभाग यह पता लगाना चाहिए कि स्कूल में नामांकन लगातार कम क्यों है। क्या अभिभावक निजी स्कूलों की ओर जा रहे हैं? क्या स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी है? क्या शिक्षण व्यवस्था बच्चों और अभिभावकों का भरोसा कायम नहीं कर पा रही है?
क्या शिक्षा विभाग बनाएगा कोई ठोस योजना?
महापौर ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें बेहतर शिक्षा एवं सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है। यह बात अपनी जगह सही है, लेकिन नौ बच्चों वाले स्कूल का आंकड़ा इस जिम्मेदारी की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि निरीक्षण के बाद केवल रिपोर्ट तैयार होती है या कम बच्चों वाले इस स्कूल को फिर से बच्चों और अभिभावकों का भरोसा दिलाने के लिए ठोस कार्ययोजना भी बनाई जाती है क्योंकि सरकारी स्कूल की सफलता केवल भवन, शिक्षक और निरीक्षण से नहीं, बल्कि उसमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता से तय होती है।