ऑनलाइन परीक्षा सेंटर नहीं होने से लाखों विद्यार्थी परेशान
लेख
17-Aug-26
जिले के छात्रों को करना पड़ रहा लंबा सफर, उठाते हैं आर्थिक और मानसिक परेशानी
जनमत में 66 प्रतिशत लोगों ने जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों को माना जिम्मेदार
26 प्रतिशत ने सिर्फ जनप्रतिनिधियों को ठहराया दोषी
समीक्षक: राम कुमार विश्वकर्मा
छिंदवाड़ा
जिले के विकास को लेकर लगातार बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। राजनीतिक मंचों से लेकर प्रशासनिक स्तर तक जिले के तेजी से विकास, बेहतर सुविधाओं और आधुनिक व्यवस्थाओं की बात कही जाती है। प्रदेश के प्रमुख शहरों में छिंदवाड़ा की गिनती होने और जिले को संभाग बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद शिक्षा और रोजगार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सुविधा अब भी विद्यार्थियों से दूर है। जिले के हजारों विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की ऑनलाइन परीक्षाओं में शामिल होने के लिए छिंदवाड़ा से बाहर या दूरदराज के परीक्षा केंद्रों तक सफर करना पड़ रहा है।
यह स्थिति सिर्फ विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण नहीं है, बल्कि जिले में उपलब्ध डिजिटल और शैक्षणिक बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े करती है। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती परीक्षाओं, प्रवेश परीक्षाओं और अन्य ऑनलाइन परीक्षाओं में जब विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र आवंटित होता है, तो कई बार उन्हें दूसरे शहरों अथवा जिले के दूरस्थ क्षेत्रों तक जाना पड़ता है। इससे परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों पर भी अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक बोझ पड़ता है।
विकास के दावों के बीच सुविधा का सवाल
छिंदवाड़ा में शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, रेलवे और अन्य क्षेत्रों में विकास को लेकर लंबे समय से योजनाओं और उपलब्धियों की चर्चा होती रही है। जिला मुख्यालय लगातार विस्तार कर रहा है और शहर में आधुनिक सुविधाओं का विकास भी हो रहा है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि यदि छिंदवाड़ा बड़े शहरों की श्रेणी में अपनी पहचान बना रहा है, तो यहां सभी प्रमुख ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए पर्याप्त और अधिकृत परीक्षा केंद्र क्यों नहीं उपलब्ध हो पा रहे हैं?
ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों की कमी का सबसे सीधा असर उन युवाओं पर पड़ता है जो सरकारी नौकरी, बैंकिंग, रेलवे, कर्मचारी चयन, प्रवेश परीक्षाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। परीक्षा केंद्र दूसरे शहर में मिलने पर उन्हें परीक्षा से एक दिन पहले ही यात्रा करनी पड़ रही है। कई विद्यार्थियों को परिवहन, भोजन और ठहरने के लिए अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह परेशानी और भी बड़ी हो जाती है। कई बार विद्यार्थी के साथ अभिभावक को भी जाना पड़ता है। ऐसे में एक परीक्षा का खर्च सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है।
छिंदवाड़ा अपडेट के जनमत में सामने आई जनता की राय
इसी मुद्दे को लेकर छिंदवाड़ा अपडेट ने जनमत के माध्यम से आम नागरिकों से सवाल पूछा कि -
“छिंदवाड़ा जिला अब तक सभी तरह की ऑनलाइन परीक्षाओं का सेंटर नहीं बन पाया, इसके लिए आपके मत से कौन जिम्मेदार है?”
जनमत में लोगों ने स्पष्ट रूप से अपनी राय रखी। सबसे अधिक 66 प्रतिशत लोगों ने ‘दोनों ही जिम्मेदार’ विकल्प चुना। यानी जनता के एक बड़े वर्ग का मानना है कि इस समस्या के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रशासन की भी समान जिम्मेदारी है।
वहीं 26 प्रतिशत लोगों ने सिर्फ जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार माना। 6 प्रतिशत लोगों ने प्रशासन को जिम्मेदार बताया, जबकि 2 प्रतिशत लोगों ने ‘कुछ कह नहीं सकते’ विकल्प चुना।
इस प्रकार जनमत का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि जनता इस समस्या को केवल प्रशासनिक अथवा राजनीतिक स्तर की कमी नहीं मानती, बल्कि दोनों के बीच समन्वय की कमी को इसके लिए जिम्मेदार मान रही है।
66 प्रतिशत का संदेश, जिम्मेदारी दोनों की
जनमत का 66 प्रतिशत परिणाम अपने आप में महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ यह है कि आम नागरिकों की नजर में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल घोषणाओं और विकास कार्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जनता चाहती है कि जिले के युवाओं से जुड़े ऐसे व्यावहारिक मुद्दों को भी प्राथमिकता दी जाए, जिनका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।
वहीं प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों के लिए आवश्यक भवन, कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सुरक्षा व्यवस्था, बिजली की निर्बाध उपलब्धता और अन्य तकनीकी मानकों को पूरा करने के लिए संबंधित विभागों को पहल करनी होती है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों द्वारा केंद्रों की मांग को संबंधित एजेंसियों के सामने प्रभावी तरीके से रखना और प्रशासन द्वारा आवश्यक संसाधन एवं समन्वय उपलब्ध कराना दोनों जरूरी हैं।
छात्रों के लिए सिर्फ सेंटर नहीं, अवसर का सवाल
ऑनलाइन परीक्षा केंद्र को केवल एक परीक्षा स्थल के रूप में देखना समस्या को छोटा करके देखने जैसा होगा। आज प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों के सामने प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक है। ऐसे में परीक्षा केंद्र तक पहुंचना भी उनके लिए चुनौती बन जाए तो यह व्यवस्था की गंभीर समस्या है। छिंदवाड़ा जिले में बड़ी संख्या में विद्यार्थी ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए दूसरे शहर में जाकर परीक्षा देना कई बार आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर कठिन होता है। कुछ विद्यार्थी यात्रा की असुविधा, अतिरिक्त खर्च या समय की कमी के कारण परीक्षा में शामिल होने का अवसर भी गंवा सकते हैं।
संभाग बनने की प्रक्रिया के बीच उठ रहा सवाल
छिंदवाड़ा को संभाग बनाने की घोषणा के बाद जिले के प्रशासनिक महत्व में और वृद्धि होने की उम्मीद है। संभाग बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और जिले को भविष्य में और अधिक प्रशासनिक एवं संस्थागत सुविधाएं मिलने की संभावना है। ऐसे समय में यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या छिंदवाड़ा को सभी प्रमुख ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए भी सक्षम केंद्र के रूप में विकसित नहीं किया जा सकता? यदि जिले में पर्याप्त संख्या में मानक अनुरूप परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएं तो इससे न केवल छिंदवाड़ा बल्कि आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी लाभ मिल सकता है।
जनप्रतिनिधियों से पहल की उम्मीद
जनमत के परिणाम से स्पष्ट है कि नागरिक इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों से सक्रिय पहल की उम्मीद कर रहे हैं। सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि संबंधित परीक्षा एजेंसियों, केंद्र एवं राज्य सरकार के विभागों के साथ समन्वय कर छिंदवाड़ा में अधिकाधिक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र स्वीकृत कराने की दिशा में पहल कर सकते हैं। इसके लिए जिले में उपलब्ध शैक्षणिक संस्थानों, निजी तकनीकी संस्थानों और अन्य अधोसंरचनाओं का सर्वे कर उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सकता है। यदि जरूरत हो तो नए परीक्षा केंद्रों के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की योजना भी बनाई जा सकती है।
जनता का इशारा समझे प्रशासन और जनप्रतिनिधि
छिंदवाड़ा अपडेट के जनमत में 66 प्रतिशत लोगों का ‘दोनों ही जिम्मेदार’ कहना इसी ओर इशारा करता है कि जनता अब केवल विकास के दावों को सुनना नहीं चाहती, बल्कि उसका असर जमीन पर देखना चाहती है। जिले के विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े, इसके लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासन दोनों को मिलकर ठोस पहल करनी होगी।