आपदा मित्रों को दिया गया सर्पदंश से बचाव और जागरूकता प्रशिक्षण
छिंदवाड़ा
25-Oct-26
छिंदवाड़ा अपडेट

सांप का काटना एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल है, जिसकी शीघ्र पहचान और त्वरित उपचार से बहुमूल्य जीवन बचाया जा सकता है। इसी उद्देश्य के तहत सामुदायिक जागरूकता लाने के लिए होम गार्ड परिसर में आपदा मित्रों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान सर्पमित्र हेमंत गोदरे ने उपस्थित आपदा मित्रों को संबोधित करते हुए बताया कि बरसात के समय सर्पदंश की घटनाएं अक्सर बढ़ जाती हैं, जिससे बचने के लिए नागरिकों का जागरूक रहना बेहद आवश्यक है। उन्होंने जानकारी दी कि देश में सांपों की लगभग 250 से 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कोबरा, करेत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर अत्यंत जहरीले सांपों की श्रेणी में आते हैं, जबकि शेष सभी सांप गैर-विषैले (नॉन-पॉइजनस) होते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि सांप काटने की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक देखने को मिलती हैं। अक्सर ग्रामीणजन झाड़फूंक के चक्कर में बहुमूल्य समय व्यर्थ कर देते हैं, जिससे पीड़ित की स्थिति गंभीर हो जाती है और कई बार जान तक चली जाती है। सर्पदंश की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटीवेनम इंजेक्शन लगवाना चाहिए, जो सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क उपलब्ध होता है।
इस अवसर पर सर्पमित्र राहुल डोंगरे ने विषैले और गैर-विषैले सांपों में अंतर स्पष्ट करने के साथ-साथ सांप के काटने पर बरती जाने वाली सावधानियों और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में होम गार्ड के एएसआई वुदमान धुर्वे, मेजर आर. सिगोतिया और एसडीआरएफ के सचिन विश्वकर्मा का सराहनीय सहयोग रहा।
सांप काटने पर रखें इन बातों का विशेष ध्यान:-
घाव की सफाई: काटे गए स्थान को तुरंत साबुन और पानी से साफ करें।
बेडेंज लगाएं: संक्रमण और फैलाव रोकने के लिए हल्के हाथ से बैंडेज या सपोर्ट पट्टी बांधें।
इन बातों से बचें: पीड़ित को भूलकर भी पानी न पिलाएं और सोने न दें।
समय न गंवाएं: झाड़फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाय बिना किसी विलंब के मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।