सोलह कलाओं से पूर्ण शरद पूर्णिमा आज
धर्म
24-Oct-26
छिंदवाड़ा अपडेट
ज्योतिषीय सिद्धांत के अनुसार पूर्णिमा- चंद्रमा- दूध- चावल- चांदी इत्यादि की एक ही प्रकृति है और विशेष कर शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं पर रहता है। चंद्रमा की किरणों से और इन सबके संयोग से एक अमृत तुल्य औषधि का निर्माण होता है। जो व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होती है इसलिए पूर्णिमा का महत्व अधिक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आकाश से शीतल चांदनी के रूप में अमृत बरसता है इसलिए पूर्णिमा का महत्व अधिक है।
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ
25 अक्टूबर, सुबह 11:55 बजे/
पूर्णिमा तिथि समाप्त
26 अक्टूबर, सुबह 09:41बजे/
निशीथ काल पूजा मुहूर्त
{कोजागिरी लक्ष्मी पूजा}
रात्रि 11.39 से 12.31 तक
{ 25 - 26 अक्टूबर की मध्य रात्रि}
शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर रखने का महत्व-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण माना जाता है। इस रात चाँदनी में खीर रखने और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है।
धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं :-
अमृतमय प्रसाद
माना जाता है कि खुले आसमान के नीचे खीर रखने से उसमें चंद्रमा की सकारात्मक और औषधीय ऊर्जा समाहित हो जाती है, जिससे यह सामान्य खीर न रहकर अमृत समान प्रसाद बन जाती है और यह खीर औषधिय गुना से भरपूर होती है।
माता लक्ष्मी का आगमन
शास्त्र मान्यताओं के अनुसार इस रात को माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और इस खीर का भोग लगाने व ग्रहण करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। और खीर का प्रसाद माता को अति प्रिय है।
नई फसल का अर्पण
यह समय धान की नई फसल के पकने का होता है, इसलिए चंद्रमा को नई फसल का चावल और दूध अर्पित करने की परंपरा रही है।
वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
आयुर्वेद के अनुसार, दूध में लैक्टिक एसिड होता है और चावल में स्टार्च। जब खीर को चांदी के बर्तन में या खुले आसमान के नीचे रखा जाता है, तो चंद्रमा की किरणों से इसे विशेष ऊर्जा मिलती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
स्वास्थ्य लाभ
ऐसा माना जाता है कि इस अमृतमयी खीर का सेवन करने से दमा (Asthma), चर्म रोग, सांस से जुड़ी बीमारियों और मानसिक रोग में विशेष लाभ मिलता है।
खीर किस बर्तन में रखनी चाहिए
चांदी के बर्तन में खीर रखना सर्वश्रेष्ठ है। इसके अलावा कांच व मिट्टी के बर्तनों में भी खीर रख सकते हैं।
शरद पूर्णिमा की खीर कब खानी चाहिए
धार्मिक परंपरा के अनुसार, खीर को रात चंद्रमा की चाँदनी में रखने के बाद अगले दिन सुबह माता लक्ष्मी जी को भोग लगाने के उपरांत प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
खीर रखते समय इन बातों का ध्यान रखें
खीर को एल्युमिनियम या प्लास्टिक के बर्तन में रखने से बचें। खीर को पूरी तरह खुला छोड़ने के बजाय साफ, खाद्य-सुरक्षित जाली से ढक दें, ताकि चाँदनी में रखते समय धूल-मिट्टी और कीड़े-मकोड़े न गिरें/