छोटी बाजार में शरद पूर्णिमा पर जीवंत हुई अनूठी रामलीला
धर्म
25-Oct-26
छिंदवाड़ा अपडेट

श्री रामलीला मंडल, छोटी बाजार, छिंदवाड़ा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मंच पर प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक भव्य एवं विशेष लीला का मंचन किया गया। दशहरे के उपरांत आयोजित होने वाले इस विशेष एक दिवसीय आयोजन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के लंका से वापस अयोध्या लौटने और तत्पश्चात भव्य राज्याभिषेक की लीला का सजीव मंचन किया गया। इस दौरान मंच पर ऐसे कई विशेष प्रसंगों को दर्शाया गया, जिनका मंचन सामान्यतः रामलीलाओं में देखने को नहीं मिलता है।
संरक्षक कस्तूरचंद जैन एवं राजू चरणागर ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर हुए इस मनमोहक मंचन में भगवान श्री राम द्वारा सीता जी के अग्नि प्रवेश के रहस्य का सुंदर उद्घाटन किया गया। प्रसंग के माध्यम से दिखाया गया कि जब लक्ष्मण जी द्वारा शूर्पणखा की नाक काटी जाती है और खर-दूषण वध होता है, तब भगवान श्री राम, लक्ष्मण जी को किसी अन्य कार्य से भेजकर माता सीता को अग्निदेव को समर्पित कर देते हैं और अग्निदेव से माता सीता का छाया रूप प्राप्त कर लेते हैं। रावण द्वारा इसी छाया रूप का हरण किया जाता है और लंका में वही छाया रूप निवास करता है।
तत्पश्चात, रावण वध के बाद जब माता सीता को पालकी में लाया जाता है, तब श्री राम सार्वजनिक रूप से उन्हें अग्नि परीक्षा देने के लिए कहते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य अग्निदेव से माता सीता के मूल स्वरूप को पुनः वापस लेना होता है। संरक्षक सतीश दुबे लाला ने बताया कि मंचन के दौरान एक अन्य अत्यंत रोमांचक प्रसंग में भगवान श्री राम द्वारा रावण वध के उपरांत अपने अनुज लक्ष्मण जी को नीति और युद्ध की शिक्षा प्राप्त करने हेतु अंतिम समय में रावण के पास भेजा जाता है। रावण लक्ष्मण जी को उपदेश देते हुए कहता है कि कभी भी अपने शत्रु को कमजोर नहीं समझना चाहिए, अच्छे कार्य तुरंत करने चाहिए और बुरे कार्य जो मन में आएं उन्हें हमेशा टालते रहना चाहिए।
इसके उपरांत, भगवान श्री राम निषादराज राजा गुह, केवट और मार्ग के सभी ऋषि-मुनियों से भेंट करते हुए अयोध्या पहुंचते हैं। अयोध्या पहुंचकर वे माता कौशल्या, माता सुमित्रा और माता कैकेयी से मिलते हैं। इस दौरान वे विशेष रूप से दासी मंथरा से भी भेंट करते हैं और उसे उस आत्मग्लानि से मुक्त करते हैं, जो उसे प्रभु को 14 वर्ष का वनवास देने के कारण हुई थी।
संरक्षक विजय आनंद दुबे एवं वीरेंद्र शुक्ला ने बताया कि प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी से संपूर्ण प्रजा में अपार हर्षाेल्लास छा जाता है। भरत जी द्वारा राज्याभिषेक की समस्त तैयारियां पूरी की जाती हैं और इसके बाद प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ लीला का भव्य समापन होता है। इस पूरी विशेष लीला का कुशल एवं प्रेरणादायी निर्देशन श्री रामलीला मंडल के अध्यक्ष श्री अरविंद राजपूत द्वारा किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी जनता और कलाप्रेमी उपस्थित रहे।
दोपहर में हवन पूजन एवं रात्रि में हुआ दूध का वितरण
श्री रामलीला मंडल के प्रवक्ता ऋषभ स्थापक ने बताया कि 14 दिवसीय लीला के सफल मंचन के पश्चात, प्रतिवर्षानुसार शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर दोपहर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम एवं महासंत श्री चौबे बाबा की जीवित समाधि का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। पूजन के उपरांत मंडल के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य हवन-पूजन संपन्न हुआ।
तत्पश्चात, रात्रि में अयोध्या लौटे श्रीराम की विशेष शरद पूर्णिमा लीला के सुखद समापन के बाद, प्रांगण में उपस्थित समस्त श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी जनता को शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रसाद स्वरूप खीर एवं दुग्ध का वितरण किया गया। महाआरती और महाप्रसाद वितरण के साथ ही इस वर्ष के 138वें ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव का भक्तिमय वातावरण में समापन हुआ।