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17 मई से विवाह में लगेगा विराम, एक माह नहीं होंगी शादियां

17 मई से विवाह में लगेगा विराम, एक माह नहीं होंगी शादियां
धर्म
13-May-26
15 जून तक रहेगा पुरुषोत्तम मास, 4 वर्ष में एक बार आता है यह माह

27 सालों में पहली बार बना ऐसा संयोग ज्येष्ठ मास में लगा पुरूषोत्तम मास

छिंदवाड़ा

इस वर्ष ज्येष्ठ मास में ही अधिक मास का आरंभ हो रहा है। अधिक मास जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। यह 17 मई, रविवार से प्रारंभ होगा और 15 जून, सोमवार को समाप्त होगा। पुरुषोत्तम मास हर 4 वर्ष में एक बार लगता है। इस बार अधिक मास लग जाने के कारण ज्येष्ठ मास 30 नहीं बल्कि पूरे 60 दिन का होगा। यानी इस साल 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे। पुरुषोत्तम मास 17 मई से लेकर 15 जून तक चलेगा। 

शास्त्रों में इस महीने में भगवान श्री हरि विष्णुजी या भगवान श्री हरि विष्णु जी के अवतार जैसे- भगवान श्री राम, श्री कृष्ण जी की पूजा अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी विवाह, गृह प्रवेश आदि कार्य वर्जित होते हैं। इस बार करीब 27 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम मास लगा है। 

अधिक/ पुरुषोत्तम मास क्यों लगता है?

अधिक मास पंचांग की गणना के कारण लगता है। चंद्र कैलेंडर के अनुसार, वर्ष लगभग 365 दिन का होता है। चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। इस तरह हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बन जाता है। यह अंतर धीरे धीरे बढ़ते हुए करीब 32 महीने और 16 दिन का हो जाता है। यह अंतर लगभग पूरे एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को ठीक करने के लिए हिंदू पंचांग में एक और महीना जोड़ जिया जाता है जिसे अधिक मास, मलमास, या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

अधिक मास / पुरुषोत्तम मास में क्या करें

पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसे में इस महीने भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा अर्चना करनी चाहिए। इस माह में भगवान श्री हरि विष्णु जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए जैसे- ऊं नमो भगवते वासुदेवाय या हरे कृष्ण महामंत्र इत्यादि या मंत्र जप नाम जप इत्यादि अधिक से अधिक करना चाहिए। इस महीने अधिक से अधिक श्रीविष्णु सहस्त्रनाम, श्री विष्णु चालीसा, श्री रामचरितमानस भागवत गीता या गीता जी इत्यादि के पाठ करने चाहिए। पुरुषोत्तम मास में अधिक से अधिक दान- पुण्य भी करना चाहिए। इस माह में जरूरतमंद के लिए अन्न- वस्त्र/ पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था/ गाय को हरा चारा इत्यादि की व्यवस्था करनी चाहिए।

अधिक मास / पुरुषोत्तम मास में न करें ये काम

अधिक मास के दौरान सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, मुंडन आदि कार्य नहीं करने चाहिए। अधिक मास में कोई भी नया काम शुरु नहीं करना चाहिए। इस माह में तामसिक व गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए। इस माह में बोलने से सावधान रहना चाहिए किसी तरह की गलत शब्द, मिथ्या वचन व अनर्गल वार्तालाप से बचना चाहिए।

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