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सिविल डिफेंस वालेंटियर्स को प्राथमिक उपचार और रेस्क्यू का दिया प्रशिक्षण

सिविल डिफेंस वालेंटियर्स को प्राथमिक उपचार और रेस्क्यू का दिया प्रशिक्षण
छिंदवाड़ा
03-Jul-26
संभागीय कमांडेंट आशीष खरे बोले, आपदा के समय समाज की सेवा के लिए आगे आएं वालेंटियर्स

छिंदवाड़ा

स्थानीय होमगार्ड परिसर में आयोजित सात दिवसीय सिविल डिफेंस वालेंटियर प्रशिक्षण के छठे दिन प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), सीपीआर तथा रेस्क्यू उपकरणों के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संभागीय कमांडेंट आशीष खरे ने वालेंटियर्स को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण में शामिल सभी स्वयंसेवक जमीनी स्तर से जुड़े लोग हैं। वे प्रशिक्षण में भले ही बिना किसी विशेष अनुभव के आए हों, लेकिन सात दिनों के इस प्रशिक्षण के बाद वे न केवल अपनी सुरक्षा करना सीखेंगे, बल्कि आपदा की स्थिति में दूसरों का जीवन बचाने और आवश्यक सेवाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। उन्होंने विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की बाढ़ और वेनेजुएला में आए भूकंप जैसी घटनाओं से सीख लेकर समाज को जागरूक करना आवश्यक है, ताकि आपदा के समय जनहानि को कम किया जा सके।

कमांडेंट स्नेहलता पाठ्या ने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से जिले के सिविल डिफेंस वालेंटियर्स को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शासन अपने स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारियां करता है, लेकिन किसी भी आपदा के शुरुआती दौर में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्थानीय नागरिकों की होती है। इसलिए लोगों को जागरूक और प्रशिक्षित करना समय की आवश्यकता है।

रिसोर्स पर्सन श्यामल राव ने पिछले पांच दिनों में दिए गए प्रशिक्षण का पुनरावलोकन कराया तथा प्रतिभागियों की व्यवहारिक क्षमता का मूल्यांकन किया। उन्होंने आपदा के दौरान मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के बाद प्राथमिक उपचार, रक्तस्राव रोकने के लिए बैंडेज लगाने तथा घायल अंग को सुरक्षित रखने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण के दौरान एसडीईआरएफ के जवान सुमित शर्मा, सचिन विश्वकर्मा, अंकित पांडे और राजा मर्सकोले ने ध्वस्त भवनों में फंसे लोगों के रेस्क्यू में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों का प्रदर्शन किया। इनमें एक्स, जैक, हाइड्रोलिक मशीन, एयर कंप्रेसर, मोटर रबर बोट, फुल बॉडी हार्नेस, फ्लोटिंग पंप, चेन सॉ, डीप डाइविंग सेट, स्नेक कैचर, हेलमेट, रोटरी हैमर और इलेक्ट्रिक ड्रिल सहित अन्य उपकरणों के उपयोग एवं संचालन की जानकारी दी गई।

वहीं एसडीईआरएफ के जवान दीपेंद्र बरकड़े ने घायल व्यक्ति को पुनर्जीवित करने के लिए सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने की सही प्रक्रिया, उचित समय तथा आवश्यक सावधानियों की जानकारी देकर प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित वालेंटियर्स ने भी विभिन्न आपदा प्रबंधन तकनीकों का अभ्यास किया और विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
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