इधर कलेक्टर बैठक ले रहे थे उधर भूमिहीनों के पक्के आवास निगम ने ढहाए
छिंदवाड़ा
26-Feb-26
सरकार, प्रशासन और निगम की कार्रवाई में विरोधाभास
छिंदवाड़ा
एक तरफ तो प्रदेश की भाजपा सरकार भूमिहीनों को पट्टे देना चाहती है और इसी संबंध में जिला प्रशासन कलेक्ट्रेट कार्यालय बैठक कर पात्र हितग्राहियों की सूची बना रहा है तो वहीं नगर निगम का अमला ऐसे लोगों के पक्के मकान गिरा रहा है जो पहले से ही भूमिहीन थे बस उनकी गलती यह थी कि उनके पास पट्टा नहीं है। सरकार, प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई में काफी बड़ा विरोधाभास नजर आया।
सरकार पट्टे देना चाहती है
प्रदेश सरकार गरीब भूमिहीन नागरिकों को पट्टे प्रदान कर उनके आवास की व्यवस्था बनाना चाहती है इस हेतु सरकार पात्र नागरिकों से आवेदन करने की प्रक्रिया पूर्ण करा रही है ताकि अधिक से अधिक भूमिहीन गरीब नागरिकों को आवास की सुविधा प्रदान की जा सके और गरीबों के स्वयं के आवास का सपना पूरा हो सके।
जिला प्रशासन तैयार कर रहा पात्रता सूची
प्रदेश सरकार की मंशानुरूप गरीब और भूमिहीन परिवारों को उनके आवास मिल सके इसके लिए 403 लोगों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में आवेदन किया जिनमें से मात्र 19 आवेदक भूमि आवंटन के लिए पात्र पाए गए है। ये ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक शहर में ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है जबकि प्रशासन द्वारा मात्र 19 लोगों को इस योग्य माना जा रहा है।
भूमिहीनों को माना अतिक्रमणकारी
सरकार, प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली में बड़ा विरोधाभास दिखाई दे रहा है। एक ओर सरकार आवासहीनों को पट्टा देना चाहती है, जिला प्रशासन मात्र कुछ पात्र लोगों को इसका लाभ देना चाहता है तो वहीं नगर निगम पहले से ही भूमिहीनों की गाढ़ी कमाई से बने पक्के मकानों को अतिक्रमणकारी समझ कर जेसीबी से ढहा रहा है।
गरीबों के लाखों रूपए हुए बर्बाद
गुरूवार को नगर निगम ने खैरी भोपाल क्षेत्र में गरीबों के बने पक्के मकानों पर जेसीबी चला दी जबकि ये सभी गरीब और पट्टाविहीन और भूमिहीन लोग है। यह समझ से परे है कि सरकार गरीब आवासहीनों को पट्टे देना चाहती है, जिला प्रशासन कुछ ही लोगों को देना चाहता है और नगर निगम बने बनाए ऐसे आवासों पर जेसीबी चलाता है।