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बड़ा बनने के लिए छोटों को साथ लेना पड़ता है

बड़ा बनने के लिए छोटों को साथ लेना पड़ता है
छिंदवाड़ा
17-Apr-26
समीक्षक - राम कुमार विश्वकर्मा

शहर के बड़े-बड़े शॉपिंग कॉम्पलेक्स, मुख्य बाजार की दुकानें और शॉपिंग मॉल यदि छिंदवाड़ा शहर की शान है तो फुटपाथ का व्यापार शहर की जान है। छिंदवाड़ा का सुंदर स्वरूप यदि शॉपिंग कॉम्पलेक्स और मॉलों से है तो फुटपाथ के व्यापारियों से बाजार की रौनक है।

सरकारी अथवा प्रशासनिक मदद के बिना चला रहे व्यापार

ईएलसी चौक और एकता पार्क के आसपास का क्षेत्र हो या फिर खजरी चौराहा, या फिर शहर का कोई भी ऐसा भाग जहां फुटपाथ पर व्यापार हो रहा है ये सभी अपनी आजीविका स्वयं की मेहनत से चला रहे हैं न कि सरकार और प्रशासन की मदद से। इनमें से अधिकांश व्यापारियों की आय का बड़ा हिस्सा ईएमआई भरने में जाता है और शेष बचे रूपये घर चलाने और बच्चों का अच्छा भविष्य बनाने में खर्च होते हैं।

जहां अरमान नहीं होते वह जगह श्मशान सी होती है

इन व्यापारियों को जहां-जहां से भी नगर निगम प्रशासन ने हटाया है वहां जाकर देखिए श्मशान सी शांति महसूस होगी क्योंकि जहां अरमान नहीं होते वह जगह श्मशान सी होती हैं। फुटपाथ पर व्यापार ही नहीं होता बल्कि कई गरीबों के सपने भी पलते हैं फिर चाहे पढ़ाई करके सरकारी कर्मचारी/अधिकारी बनना हो या फिर बड़ा व्यापारी/उद्योगपति। 

शहर की आर्थिक प्रगति का पहिया है ये व्यापारी

नगर निगम प्रशासन केवल अतिक्रमण नहीं हटा रहा कई गरीबों के सपनों पर जेसीबी चला रहा है। निगम या जिला प्रशासन की कार्रवाई से इन फुटपाथ व्यापारियों का परिवार पालने के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो जाता है लेकिन इस दर्द को वो क्या समझेंगे जो एयरकंडीशनर सरकारी बंगलों में रहते हैं और एयरकंडीशनर कारों से शहर में घूम कर फुटपाथ व्यापारियों को शहर के विकास में रोड़ा समझते हैं। फुटपाथ व्यापारियों को हटाना यानि शहर की आर्थिक प्रगति को रोकना भी है। आज छिंदवाड़ा शहर का फुटपाथ व्यापारी प्रतिदिन छिंदवाड़ा के व्यापार में बड़ी हिस्सेदारी निभा रहा है जिससे शहर की गरीबी रेखा के लोग अपनी मेहनत से समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्हें हटाने के बजाए व्यवस्थापन की प्रक्रिया करेंगे तो शहर की आर्थिक प्रगति में उनके योगदान का सहयोग मिलेगा।

अधिकारी चले जाएंगे जनप्रतिनिधि रह जाएंगे

हम फुटपाथ व्यापारियों का केवल दर्द बंया कर रहे हैं उनका समर्थन नहीं कर रहे हैं। छिंदवाड़ा शहर को व्यापारिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक सहित अन्य मोर्चों पर समृद्ध करना है तो हर छोटी-बड़ी चीजों को साथ चलना होगा और ये बात जनप्रतिनिधियों को समझना होगा। प्रशासनिक अधिकारी तो तीन-चार सालों में चले जाएंगे लेकिन जनता को और जनप्रतिनिधियों को एक साथ यही रहना है। समय बलवान होता है यदि आज जनप्रतिनिधि सभी को साथ लेकर नहीं चलेंगे तो आने वाले समय में इसकी कीमत भी उन्हें ही चुकानी होगी।


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