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पांजरा की महिलाएं बनी प्रकृति रक्षक, संरक्षित कर रही विलुप्त प्रजातियों के बीज

पांजरा की महिलाएं बनी प्रकृति रक्षक, संरक्षित कर रही विलुप्त प्रजातियों के बीज
कृषि जगत
05-Jun-26
सीडबॉल अभियान, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल

छिन्दवाडा 

जिले के ग्राम पांजरा में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रेरणादायक अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य देशी एवं नेटिव वृक्षों की विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित करना तथा उजड़ चुके क्षेत्रों को पुनः हरित बनाना है। इस अभियान के अंतर्गत देशी पेड़ों और पौधों के बीजों को एकत्रित कर सीडबॉल तैयार किए जाते हैं और उन्हें उन स्थानों पर फैलाया जाता है जहाँ पेड़ों की संख्या कम हो चुकी है, जैसे सड़क किनारे, बंजर भूमि, पहाड़ी क्षेत्र तथा खेतों की फेंसिंग के आसपास। ग्राम पांजरा की यह प्रेरणादायक पहल प्रकृति को नया जीवन देने का काम कर रही है। यहां पिछले तीन वर्षों से सीडबॉल आंदोलन के माध्यम से देशी एवं नेटिव वृक्षों की प्रजातियों के संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने का अभियान निरंतर चल रहा है।

इस अभियान की शुरुआत प्रकृति प्रेमी और प्राकृतिक खेती के समर्थक छिंदवाड़ा के ग्राम मेढ़की ताल के सोनू बोनिया ने की। प्रकृति, देशी बीजों और जैव विविधता के प्रति उनके लगाव ने उन्हें एक ऐसे मिशन की ओर अग्रसर किया, जो आज पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी मॉडल बन चुका है। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों की यात्राओं के दौरान दुर्लभ और विलुप्ति की कगार पर पहुंच रही देशी प्रजातियों के बीजों का संग्रह किया और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।

बीजों को मिला नया जीवन

अभियान के तहत देशी वृक्षों और पौधों के बीजों को मिट्टी और गोबर से बने सीडबॉल में सुरक्षित कर उन क्षेत्रों में फैलाया जाता है, जहां हरियाली कम हो चुकी है। सड़क किनारे, बंजर भूमि, पहाड़ी क्षेत्रों और खेतों की मेड़ों पर इन सीडबॉल को फैलाया जाता है, ताकि बारिश के मौसम में बीज अंकुरित होकर नए पौधों का रूप ले सकें। सोनू बोनिया द्वारा संरक्षित बीजों में लौकी की लगभग 70 पारंपरिक किस्में, गिलकी की 7 से 8 किस्में और कई देशी सब्जियों के बीज शामिल हैं। इसके अलावा जंगलों में पाए जाने वाले अनेक देशी और नेटिव वृक्षों के बीज भी संग्रहित कर विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचाए जा रहे हैं।

महिलाओं की भागीदारी बनी अभियान की ताकत

इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। गांव की महिलाएं सीडबॉल निर्माण में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, बल्कि महिलाएं प्रकृति संरक्षण की इस मुहिम की महत्वपूर्ण साझेदार भी बन रही हैं। सामुदायिक सहभागिता के कारण यह अभियान गांव में एक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।

केवल वृक्षारोपण नहीं, जैव विविधता का संरक्षण भी 

यह पहल सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य देशी बीजों का संरक्षण, पारंपरिक कृषि विरासत को बचाना, जैव विविधता को बढ़ावा देना और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

प्रेरणा बन रहा है पांजरा 

ग्राम पांजरा से शुरू हुआ यह सीडबॉल आंदोलन अब आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी प्रेरित कर रहा है। मेढ़की ताल के श्री सोनू बोनिया पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिनमें ग्राम पांजरा की महिलाएं उनका सहयोग करती आ रही थीं। ग्राम पांजरा, मेढ़की ताल से लगभग 3 किमी की दूरी पर है। ये महिलाएं समय पर अपने घर पहुंच सकें और आराम से इस सीडबॉल अभियान में सक्रिय सहभागिता कर सकें, इसीलिए श्री सोनू ने इसकी शुरूआत उनके ही ग्राम पांजरा से की। कम संसाधनों में प्रकृति संरक्षण का यह मॉडल यह संदेश दे रहा है कि यदि समुदाय एकजुट होकर प्रयास करे, तो पर्यावरण संरक्षण सीमित न होकर जनभागीदारी से एक बड़े परिवर्तन का माध्यम बन सकता है। प्रकृति संरक्षण, देशी बीजों के संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता का यह अनूठा संगम ग्राम पांजरा को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में स्थापित कर रहा है।
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