अतिक्रमण हटाने नहीं व्यवस्थापन के पक्ष में है शहर की जनता
छिंदवाड़ा
17-Jan-26
‘छिंदवाड़ा अपडेट’ के ‘जनमत’ में 80 प्रतिशत जनता ने दिया अपना मत
छिंदवाड़ा
शहर के अंदर फुटपाथ व्यापारियों द्वारा सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को व्यवस्थित यातायात में बाधक माना गया है लेकिन ये भी सच है कि शहर में पार्किंग के अभाव में वाहनों के साथ खरीदारी करना आम नागरिकों की मजबूरी है और रही सही कसर दुकानदारों द्वारा सड़कों पर सजने वाला बाजार पूरी कर देता है। केवल फुटपाथ पर व्यापार करने वाले गरीब व्यापारियों को इसके लिए दोषी नहीं माना जा सकता है। इसके लिए दोषी नगर प्रशासन भी है जो आज तक बाजार में खरीदारी करने आए नागरिकों के लिए पार्किंग की व्यवस्था नहीं कर पाया और दोषी वे दुकानदार भी हैं जो सड़कों पर अपनी दुकानें सजाते हैं। सड़कों पर सजी दुकानों के कारण सड़कें सबसे ज्यादा संकरी हो जाती है जिससे आने-जाने वाले लोगों के अलावा खरीदारी करने आए लोगों को भी परेशानी होती है। और पूरा ठिकरा फोड़ दिया जाता है फुटपाथ व्यापारियों पर। बलि का बकरा बना दिया जाता है इन गरीब व्यापारियों को जिसके कारण कई-कई दिनों तक इनके घरों में चूल्हा तक नहीं जल पाता।
छिंदवाड़ा अपडेट ने इस मामले में शहरवासियों का मत लिया कि अतिक्रमण के नाम पर इन छोटे और गरीब व्यापारियों को हटाना कितना उचित है। इस मामले में सैकड़ों शहरवासियों ने अपना मत दिया है। छिंदवाड़ा अपडेट की इस मुहिम को शहरवासियों ने हाथोंहाथ लिया और अपना अभिमत दिया है। आईए जानते हैं शहरवासियों ने किन विकल्पों को कितना मत दिया।
हमने जनमत में शहर की जनता से प्रश्न किया था कि नगर निगम को फुटपाथ व्यापारियों को हटाना चाहिए या उनका व्यवस्था करना चाहिए?
विकल्प 1. हटाना चाहिए
इस बिंदु पर हमें लगभग 11.4 प्रतिशत मत मिले हैं। इसका मतलब है कि इस बिंदु को 100 में से 11 लोगों ने अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को सही ठहराया है।
विकल्प 2. व्यवस्थापन करना चाहिए
इस विकल्प पर 100 में से 82.3 प्रतिशत लोगों ने अपना मत दिया है। इसका सीधा सा मतलब है कि शहर के जनता फुटपाथ पर बैठे छोटे और गरीब व्यापारियों को बार-बार अतिक्रमण के नाम पर हटाने के बजाए उनका व्यवस्थापन चाहती है। नगरीय प्रशासन को चाहिए कि आम जनता के मत को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही फुटपाथ पर व्यापार करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए व्यवस्थापन की व्यवस्था करनी चाहिए।
विकल्प 3. कुछ नहीं कह सकते
तीसरे नंबर पर हमने विकल्प दिया था कुछ नहीं कह सकते जिसे मात्र 00.09 प्रतिशत लोगों ने मत दिया। इस विकल्प से यह स्पष्ट हुआ कि शहरवासी चुप नहीं है। वे सारी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
विकल्प 4 . कुछ नहीं करना चाहिए
चौथे नंबर के विकल्प को भी शहरवासियों ने नकार दिया। उनका मत है कि अतिक्रमण तो हटाना चाहिए लेकिन छोटे व्यापारियों के व्यवस्थापन की प्रक्रिया की जानी चाहिए। 100 में से मात्र 05.05 प्रतिशत शहरवासियों ने कुछ नहीं करना चाहिए विकल्प को चुना।
नगरीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि गंभीरता से ले
छिंदवाड़ा अपडेट ने शहर के विभिन्न मुद्दों पर शहरवासियों का मत लेने के लिए जनमत पोल प्रारंभ किया है जिसमें प्रतिदिन शहरवासी अपना मत देते हैं। छिंदवाड़ाा अपडेट जिन मुद्दो को उठा रहा है या भविष्य में उठाएगा वे सीधे-सीधे जनता से जुड़े हुए होंगे। यदि मुद्दों पर जनता के नजरियों को सही ढंग से नहीं समझा जाएगा तो भविष्य में नगरीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जनता का भरोसा उठ जाएगा। अतः छिंदवाड़ा अपडेट के मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।