Home News Business Offers Classified Jobs About Contact

क्षेत्र में 3 मौतों के बाद जन्मदिन का जश्न कितना उचित?

क्षेत्र में 3 मौतों के बाद जन्मदिन का जश्न कितना उचित?
लेख
17-Jan-26
समीक्षक - राम कुमार विश्वकर्मा

छिंदवाड़ा

ये सवाल छिंदवाड़ा अपडेट नहीं उठा रहा और न जिले का मीडिया उठा रहा है। ये सवाल उठ रहे हैं राजनीतिक गलियारों से, जो आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। विधायक क्षेत्र की जनता का केवल प्रतिनिधि नहीं होता है वो क्षेत्र का मुखिया होता है और उसके क्षेत्र की जनता उसका परिवार होता है। जैसा कि अक्सर नेता अपने भाषण में लोगों के बीच यह बात कहते हैं। फिर ऐसे मुखिया (जनप्रतिनिधि) को जन्मदिन मनाते समय यह याद क्यों नहीं रहा कि उसके परिवार में एक नहीं, दो नहीं 3-3 मौतें हो गई है। क्षेत्र में मातम मन रहा हो और उसके मुखिया जन्मदिन मनाए तो राजनीतिक हलकों में प्रश्न उठाने का अवसर स्वयं विधायक ने दिया है तो प्रश्न उठना स्वाभाविक है। माना कि जनप्रतिनिधियों की व्यक्तिगत जिंदगी भी होती है लेकिन वे यदि क्षेत्र की जनता को सचमुच अपना परिवार मानते हैं तो  ऐसे माहौल में खुशियां मनाना उन शब्दों को दिखावा साबित करता है जिसमें वे परिवार के मुखिया होने का दावा करते हैं। 

दरियादिल की मिसाल बन चुके और छिंदवाड़ा में लगभग 35 वर्षों तक जनता के दिलों में राज करने वाले नेता से इतना तो सीखा जा सकता है कि क्षेत्रिय जनता को जब दुख आए तो एक जनप्रतिनिधि होने के नाते खुशियां बनाने का यह अवसर उचित नहीं है। परिवार के मुखिया होने का दायित्व जब तक नहीं निभाया जाएगा तब तक सारे दावे खोखले हैं और जब-जब कोई भी जनप्रतिनिधि अपनी जनता, अपने परिवार के दुखों से दूरिया बनाएगा, खुशियां मनाएगा तब-तब आने वाला समय उन्हें सबक जरूर सिखाएगा। जनता सब देखती है, सब जानती है, सब समझती भी है लेकिन वह उचित समय आने पर हर चीज का हिसाब-किताब कर देती है। जब दुख दिलों को छूता है तो कोई भी उससे अछूता नहीं हो सकता। कम से कम परिवार का मुखिया तो नहीं और यदि वह दुखों से अछूता है तो वह परिवार का मुखिया नहीं। खुशियां मनाने का अधिकार सभी को है लेकिन परिवार पर दुख आए तब नहीं। खुशियों के समय खुशियां और दुख के समय दुख मनाने वाला परिवार और उसका मुखिया के बीच अटूट संबंध तभी स्थापित होगा जब दोनों को एक-दूसरे के सुख-दुख की अनुभूति का अहसास होगा। इस अहसास को अपने दिलों में संजो के रखना आज के जनप्रतिनिधियों या कहे क्षेत्र के मुखिया का सबसे बड़ा दायित्व है क्योंकि सोशल मीडिया के दौर में अब लोग बातों को भूलते नहीं है बल्कि समय आने पर भुनाते हैं।

Share News On