शब्दों में पिरोया ‘मिडिल क्लास’ का जीवन
लेख
09-Dec-25
नटेश्वर कमलेश का लघु उपन्यास इन दिनों चर्चा में
छिंदवाड़ा
आधुनिक चकाचौंध से भरी दुनिया में मध्यम वर्गीय परिवार का युवा कैसे अपनी जिंदगी जीता है और अपने सपनों को कैसे परिस्थितियों के आगे टूटते हुए देखता है। कैसे रोजमर्रा के झंझावतों से जूझता है ये सब यदि आपके जीवन का भी हिस्सा है तो आपको जिले के उपन्यासकार द्वारा रचित ‘‘मिडिल क्लास’’ अवश्य पढ़ना चाहिए। उपन्यास का एक-एक शब्द आपको अपनी ही जिंदगी से न केवल परिचय कराएगा बल्कि आपको यह भी अहसास कराएगा जैसे आपके ही जीवन को उपन्यासकार ने शब्दों में पिरोकर इस उपन्यास को लिखा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं जिले के प्रख्यात लेखक नटेश्वर कमलेश की जिनका लघु उपन्यास ‘‘मिडिल क्लास’’ इन दिनों काफी चर्चा में है।
कौन है नटेश्वर कमलेश
नटेश्वर कमलेश छिंदवाड़ा जिले के चांदामेटा में निवास करते हैं। इनका जन्म 27 जुलाई 1987 को हुआ था। बचपन से ही लेखन में रूचि रखने वाले नटेश्वर कमलेश द्वारा रचित कहानयां अनेक अखबारों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है इनमें रोंग नंबर, कोल्हू की गाय, नानी का घर आदि शामिल हैं। बेहद ही सरल स्वभाव के नटेश्वर कमलेश बैकिंग सेवा के क्षेत्र में नौकरी के साथ-साथ लेखन का कार्य भी कर रहे हैं। उनका लघु उपन्यास ‘‘मिडिल क्लास’’ साहित्य के क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या कहते हैं नटेश्वर कमलेश
अपने उपन्यास के बारे में वे कहते हैं देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मध्यम वर्ग से आता है। ये मध्यम वर्ग भी दो तरह के है एक बड़े शहर के और दूसरे छोटे शहर अथवा गांव के। मध्यम वर्ग में जन्म लेकर बचपन से लेकर बुढ़ापे तक के जीवन को बहुत ही सरल शब्दों में पिरोकर उपन्यास का रूप दिया गया है। राहुल नाम के काल्पनिक पात्र के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि आज अधिकतर व्यक्ति रिश्तों में दूरी, बढ़ती जिम्मेदारी, खराब स्वास्थ्य, अचानक हो रही मृत्यु जैसी परेशानियों से चितिंत, माता-पिता की पुरानी सोच और आज की भागदौड़ वाली जिंदगी के बीच कैसे तालमेल बैठा कर मध्यम वर्ग जी रहा है।