अनगढ़ हनुमान मंदिर में धूमधाम से हुआ रुक्मणी विवाह
छिंदवाड़ा
07-Sep-26
गोपियों संग श्रीकृष्ण ने रचाया महारास

छिंदवाड़ा
स्थानीय मुख्य डाकघर के सामने स्थित अनगढ़ हनुमान मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पिछले 51 वर्षों से आयोजित हो रही संगीतमय कथा के छठवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महामंडलेश्वर नागेंद्र ब्रह्मचारी जी के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का अद्भुत वर्णन सुनकर उपस्थित श्रोता भाव-विभोर हो गए।
कथा के छठवें दिन महाराज जी ने श्रीकृष्ण के जीवन के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का सजीव वृत्तांत सुनाया। कंस वध और सांदीपनि आश्रमरू कथा की शुरुआत में बताया गया कि कैसे भगवान ने अत्याचारी कंस का वध किया। इसके पश्चात श्रीकृष्ण उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने पहुंचे, जहाँ उनकी भेंट सुदामा जी से हुई और दोनों की अटूट मित्रता की शुरुआत हुई।
आश्रम में मन न लगने पर भगवान मथुरा लौट आए। महाराज जी ने वृंदावन में गोपियों के साथ भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रचाए गए अद्भुत महारास का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया। कथा के अंतिम चरण में श्रीकृष्ण के द्वारिकाधीश बनने और माता रुक्मणी के साथ उनके पावन विवाह का प्रसंग सुनाया गया। विवाह प्रसंग के दौरान पूरा कथा पंडाल उत्सव के माहौल में डूब गया। कार्यक्रम के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी की भव्य आरती की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया और सभी के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।