71% लोगों ने पेड़ों की कटाई, प्रदूषण और कंक्रीटीकरण तीनों को ठहराया जिम्मेदार
लेख
07-Sep-26
छिंदवाड़ा

जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में इस वर्ष मानसून की असमान चाल और कम बारिश को लेकर शहरवासी चिंतित हैं। छिंदवाड़ा अपडेट द्वारा कराए गए विशेष जनमत सर्वे में कम बारिश के कारणों पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार, अधिकांश नागरिकों का मानना है कि पर्यावरण संतुलन बिगड़ने के लिए कोई एक कारण नहीं, बल्कि घटती हरियाली, बढ़ता प्रदूषण और अंधाधुंध कंक्रीटीकरण संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं।
जनमत सर्वे के आंकड़े (प्रतिशत में)
तीनों कारण मुख्य (71.2%)
सर्वे में शामिल सबसे ज्यादा 71.2 प्रतिशत लोगों का स्पष्ट मानना है कि पेड़ों की कमी, बढ़ता प्रदूषण और शहरों का तेजी से होता कंक्रीटीकरण—ये तीनों ही घटक मिलकर स्थानीय मौसम चक्र को प्रभावित कर रहे हैं।
पेड़ों की कमी (17.8%)
17.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने केवल 'पेड़ों की घटती संख्या और जंगलों की कटाई' को ही बारिश कम होने की मुख्य वजह माना।
बढ़ता प्रदूषण (8.2%)
8.2 प्रतिशत लोगों के अनुसार शहर में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण इसका प्रमुख कारण है।
कंक्रीटीकरण (2.7%)
वहीं 2.7 प्रतिशत नागरिकों ने शहर में पक्के निर्माण, कंक्रीट की सड़कों और खुले मैदानों की कमी को जिम्मेदार बताया।
पर्यावरण संतुलन पर गहराता खतरा
पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि जब शहर में हरियाली कम होती है और कंक्रीट का दायरा बढ़ता है, तो 'अर्बन हीट आइलैंड' (Urban Heat Island) का प्रभाव उत्पन्न होता है। सड़कों और बहुमंजिला इमारतों के कारण तापमान बढ़ता है, जिससे स्थानीय स्तर पर बारिश कराने वाले बादल ठहर नहीं पाते और आगे निकल जाते हैं।
सर्वे के नतीजे साफ संकेत देते हैं कि छिंदवाड़ा की जनता पर्यावरण के प्रति जागरूक है और यह मानती है कि यदि समय रहते वृहद स्तर पर पौधरोपण और कंक्रीटीकरण पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और अधिक गहरा सकता है।