ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर प्रसूता की मौत
छिंदवाड़ा
12-Aug-26
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

छिंदवाड़ा/सौसर
सौसर सिविल अस्पताल में प्रसव के बाद एक प्रसूता की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। करीना शेंडे की सीजर ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने और छिंदवाड़ा के बाद नागपुर में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
परिजनों के अनुसार करीना शेंडे को प्रसव के लिए सौसर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार को चिकित्सक की उपलब्धता को लेकर स्थिति बनी और बाद में सावनेर से महिला चिकित्सक को बुलाकर सीजर ऑपरेशन किया गया। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसका ब्लड प्रेशर गिर गया। हालत गंभीर होने पर उसे पहले छिंदवाड़ा और फिर नागपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां बुधवार को उसकी मौत हो गई।
22 साल से विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी
घटना के बाद सौसर सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों, संसाधनों और स्टाफ की कमी का मुद्दा फिर सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सौसर का स्वास्थ्य केंद्र करीब 22 वर्षों से एमडी स्तर के विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी से जूझ रहा है। आपातकालीन सेवाओं, ब्लड की उपलब्धता और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के कारण गंभीर मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर करना पड़ता है। नागरिकों का सवाल है कि यदि अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं तो प्रसव जैसे संवेदनशील मामलों में आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की मांग
परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि महिला की मेडिकल हिस्ट्री, ऑपरेशन रिकॉर्ड, रेफरल नोट और छिंदवाड़ा एवं नागपुर में हुए उपचार से संबंधित दस्तावेजों की विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए। जांच में यदि किसी स्तर पर चिकित्सीय लापरवाही, उपचार में देरी अथवा निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार चिकित्सकों और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
बीएमओ ने कहा- लगातार व्यवस्थाएं बनाने के प्रयास
बीएमओ डॉ. रूपेश बोकाडे का कहना है कि डिलीवरी विभाग में उनका प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं है। हालांकि अस्पताल में आने वाले मरीजों के उपचार और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाते हैं।