एनसीडीसी अब सहकारी समितियों को सीधे ऋण और अनुदान दे सकेगा: सांसद
राजनीति
12-Aug-26
औद्योगिक वस्तुओं के वित्तपोषण से जुड़ी पुरानी भौगोलिक सीमाओं को हटाया गया है

छिन्दवाड़ा
मंत्रालय के प्रमुख विभाग कंज्यूमर अफेयर फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन और कोयला मंत्रालय संसदीय सलाहकार समिति के सदस्य एवं सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि संसद ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में पारित हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रयासों के बाद इस बिल के पास होने से किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज और वित्तीय सहायता प्राप्त करना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम 1962 में संशोधन करता है, जिसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को सीधे वित्तीय सहायता देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) अब सहकारी समितियों या सहकारी विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं को सीधे ऋण और अनुदान दे सकेगा। औद्योगिक वस्तुओं के वित्तपोषण से जुड़ी पुरानी भौगोलिक सीमाओं को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सहकारी विकास निगम का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने वाला विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है। सरकार की मंजूरी से निगम सहकारी संगठनों की शेयर पूंजी में सीधे निवेश कर सकेगा। खाद्य पदार्थों की परिभाषा में प्रसंस्कृत खाद्य और अन्य अधिसूचित वस्तुओं को शामिल किया गया है। निगम को भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ साख जानकारी एकत्र करने और साझा करने का अधिकार दिया गया है।
सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करना है। विधेयक के तहत एनसीडीसी को सहकारी समितियों या इस क्षेत्र के विकास में लगी किसी भी इकाई को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के तहत आने वाला एनसीडीसी एक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना 1963 में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम 1962 के तहत की गई थी।
सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि एनसीडीसी के प्रमुख कार्यों में कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों और अन्य अधिसूचित वस्तुओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और आयात-निर्यात से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाना, उन्हें बढ़ावा देना और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। उन्होंने कहा कि इसके जरिये मूल अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव है। इस नये विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार जून 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन और केंद्र सरकार द्वारा सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद सहकारी क्षेत्र के विकास में एनसीडीसी की भूमिका काफी बढ़ गई है।
सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि विधेयक में एनसीडीसी के कार्यक्षेत्र (अधिकार क्षेत्र) को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत एनसीडीसी का दायरा केवल सहकारी समितियों के माध्यम से कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक सीमित न रहकर, सहकारी विकास से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा विधेयक में एनसीडीसी को सहकारी समितियों या सहकारी विकास से जुड़े किसी भी संस्थान को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है, बशर्ते इन धनराशियों का इस्तेमाल सहकारी उद्देश्यों के लिए किया जाए।