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पालकों ने की पुस्तक मेला की अवधि बढ़ाने की मांग

पालकों ने की पुस्तक मेला की अवधि बढ़ाने की मांग
छिंदवाड़ा
04-Apr-26
कई पालकों को जानकारी भी नहीं, कैसे पूरा होगा उद्देश्य?

छिंदवाड़ा

पालकों को स्टेशनरी और स्कूल ड्रेस सहित स्कूलों में काम आने वाली सामग्रियां उचित दामों में उपलब्ध हो सके इसके लिए विगत दो-तीन वर्षों से जिला शिक्षा विभाग कार्यालय द्वारा पुस्तक मेले का आयोजन किया जा रहा है। शहर में हजारों की संख्या में छात्र निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं ऐसे में पुस्तक मेले की अवधि मात्र 2 दिन रखने से कई पालक शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल का लाभ नहीं उठा पाएंगे। ऐसे में लगता है जिला प्रशासन का दो दिवसीय पुस्तक मेला औपचारिकता पूरी कर रहा है। व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं होने से कई पालकों को तो यह भी नहीं पता कि पुस्तक मेला लगाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार शिक्षा सत्र शुरू होने के पहले ही निजी स्कूलों की स्टेशनरी विक्रेताओं से सेटिंग की खबरें किसी से छिपी नहीं है। महंगी पुस्तक कॉपियों और स्कूल फीस के बोझ तले दबा पालक वर्ग इस बात से काफी नाराज रहता है। कुछ जागरूक पालकों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से प्रशासन के समक्ष उठाया जिसके कारण जिला प्रशासन ने पुस्तक मेले की व्यवस्था बनाई लेकिन यह भी औपचारिक बनकर रह गई है। 

पुस्तक मेले की नहीं मिली सूचना

शहर में लगभग 35 हजार से ज्यादा विद्यार्थी सरकारी और निजी विद्यालयों में पढ़ते हैं ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि दो दिन का पुस्तक पालकों को कितनी राहत दे पाएगा। कुछ पालकों का कहना है कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली संदिग्ध है। कम से कम इसे 4 दिनों का रखना चाहिए था और पुस्तक मेले का व्यापक गली मोहल्लों में प्रचार-प्रसार करना था ताकि अधिक से अधिक पालक स्टेशनरी की लूटपाट से बच सके।

छूट का कोई उल्लेख नहीं

पालकों को स्टेशनरी संचालकों की लूट से बचाने के लिए निर्धारित मूल्य में छूट का प्रावधान किया जाना चाहिए था लेकिन यह भी इस बार नहीं दी गई। इसके अलावा अतिरिक्त पुस्तकों का बोझ कम नहीं हुआ है। स्टेशनरी संचालकों ने बहुत ही चतुराई से कुछ पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाकर नाममात्र की पुस्तक कॉपियां ही मेले में रखी है शेष पुस्तक-कॉपी पालकों को बाद में निर्धारित दुकानों से खरीदनी ही पड़ेगी क्योंकि कुछ स्कूल संचालकों ने पहले ही इस विषय में पालकों की मीटिंग लेकर उन्हें आगह कर दिया है। पुरानी पुस्तकों से पालकगण अपने बच्चों की शिक्षा पूरी नहीं करा पाएंगे क्योंकि स्कूल संचालकों ने पालकों को बता दिया है कि सिलेबस में काफी बदलाव किया जा चुका है। 
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