जेल में प्रायोगिक प्रवचन दिए निर्ग्रन्थ दिगम्बर मुनि विश्रांत सागर जी ने
छिंदवाड़ा
11-Jan-26
छिंदवाड़ा
सकल दिगम्बर जैन महासभा के तत्वाधान में 3 मुनिराज मुनि श्री विश्रांत सागर जी, मुनि श्री सुयोग सागर जी और मुनि सुमित्र सागर जी का छिंदवाड़ा जिला जेल में आगमन हुआ । जेल प्रबंधन के सहयोग से एक धर्मसभा का आयोजन किया गया। जेल अधीक्षक प्रतीक जैन, जेलर आदि सभी ने मुनिराज को श्रीफल अर्पित करके आशीर्वाद लिया।
कैदियों को दिया उपदेश
मुनि श्री विश्रांत सागर जी ने परम वात्सल्य करुणा के साथ कैदियों को आशीर्वाद देकर संबोधित करते हुए अपनी पावन पीयूष देशना में कहा आप सभी मेरे भाई के समान हो, आप सभी सुखी हो जाएं, आपके लिए भावना भाऊंगा कि आप सभी जल्द मुक्त हो जाएं। तुलसी दास जी ने कहा है कर्म प्रधान विश्व करी राखा, जो जस करही सो तस फल चाखा।
मुनि श्री ने कहा सुख तो मुक्त अवस्था में है बंधन में नहीं है। किसी को दोष नहीं देना है चाहे जिसने रिपोर्ट लिखाई हो उसको भी दोष नहीं देना, दोष तो अपने अपने पूर्व कर्मों का है। दूसरों के लिए हमेशा अच्छी भावनाएं बनाइए कि कभी भी किसी को कष्ट न हो।
अपराध से घृणा करो अपराधी से नहीं
देश का कानून तो चाहता है कि भले ही 100 अपराधी छूट जाएं लेकिन एक निरपराधी को कभी भी सजा न मिले, आप हमेशा अपने परिणाम शांत रखें। कभी भगवान को दोष मत दिया करो। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र ने किसी को दोष नहीं दिया सिर्फ अपने ही पूर्वोपार्जित कर्मों की निंदा की। दूसरों का उपकार करना सबसे बड़ा धर्म है। सभी के प्रति दया करना चाहिए।
एक सूत्र लीजिए इसकी भावना भाईये- सुखी रहें सब जीव जगत के, कोई कभी न दुख पावे। हे भव्य जीवों ! आप लोग तो एक ही भावना बनाइए, कि हम कब अपने परिवार वालों के पास चलें जाएं। दुनिया में भगवान से भी बड़ा मां का आशीर्वाद होता है। पर को पीड़ा देना पाप है सभी के साथ उपकार कीजिए। मां, महात्मा और परमात्मा का आदर नहीं करने वाला दुखी होता है क्योंकि ये तीनों सभी का कल्याण चाहते हैं। दुनिया छोड़ देना लेकिन कभी धर्म को परमात्मा को नहीं छोड़ना।
मंच संचालन पंडित सुनील भंडारी ने किया। मंगलाचरण नंदन और सचिन ने प्रस्तुत किया। दिगम्बर जैन महासभा अध्यक्ष राजेंद्र पाटोदी, पाठशाला अध्यक्ष अशोक बाकलीवाल, अभय जैन अध्यक्ष गोलापूर्ब समाज, आर के जैन, अमित सिंघई चौरई , विशाल जैन, विवेक जैन, सुनील जैन, विनोद जैन, अनिल जैन, मुकेश जैन आदि उपस्थित थे।