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गुरु तेग बहादुर, बिरसा मुंडा व स्वामी विवेकानंद के विचारों से युवाओं को मिला राष्ट्रप्रेरणा का संदेश

गुरु तेग बहादुर, बिरसा मुंडा व स्वामी विवेकानंद के विचारों से युवाओं को मिला राष्ट्रप्रेरणा का संदेश
छिंदवाड़ा
11-Jan-26
संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में छिंदवाड़ा में भव्य युवा सम्मेलन आयोजित

छिंदवाड़ा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छिंदवाड़ा जिला महाविद्यालीन कार्यविभाग द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य युवा सम्मेलन का आयोजन स्थानीय ओलंपिक मैदान में किया गया। इस सम्मेलन में छिंदवाड़ा जिले के गांव-गांव तथा नगर की प्रत्येक बस्ती से बड़ी संख्या में युवाओं ने सहभागिता कर राष्ट्रनिर्माण के प्रति अपनी सजगता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। सम्मेलन में श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्मशताब्दी एवं स्वामी विवेकानंद जी की 163वीं जयंती के अवसर पर उनके त्याग, संघर्ष और विचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने इन महापुरुषों को राष्ट्र के सांस्कृतिक और वैचारिक आधार स्तंभ बताते हुए युवाओं से उनके जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। वक्ताओं के  विचार जानकर  युवाओं को  मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। 

मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह  हेमंत मुक्तिबोध ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने जनजातीय समाज को अन्याय, शोषण और गुलामी के विरुद्ध संघर्ष की चेतना दी। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण के महान प्रतीक थे। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सेवा, अनुशासन और सामाजिक समरसता को अपने जीवन का आधार बनाएं। श्री मुक्तिबोध ने कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाना उसका लक्ष्य है। गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान आज भी प्रासंगिक है।

 सम्मेलन में उपस्थित मुख्य अतिथि शरबजीत सिंह अरोड़ा ,कोषाध्यक्ष गुरुद्वारा कमेटी द्वारा  श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ पर उनके बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। उनका बलिदान आज के युवाओं को सत्य, साहस और धर्म की रक्षा के लिए प्रेरित करता है। स्वामी विवेकानंद के विचार  युवाओं की ऊर्जा का स्रोत है। स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उनका संदेश  “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत”, आज के युवा वर्ग के लिए मार्गदर्शक मंत्र है। विवेकानंद जी ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताया, जिसे आत्मविश्वास और चरित्र बल के साथ आगे बढ़ना चाहिए। वर्तमान में कुटुंब प्रबोधन पर विशेष जोर संघ द्वारा दिया जा रहा है। 

सम्मेलन में कुटुंब प्रबोधन के महत्व पर भी विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि मजबूत राष्ट्र की नींव सशक्त परिवारों से बनती है। आज के समय में परिवार व्यवस्था को संस्कार, संवाद और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है। युवाओं से आग्रह किया गया कि वे अपने परिवारों के साथ समय बिताएं, बुजुर्गों का सम्मान करें और सांस्कृतिक मूल्यों के विषय  में वक्ताओं द्वारा बताया  गया। वक्ताओं द्वारा  संघ के पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को  दी जा रही  प्रेरणा के संबंध में बताया गया। संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर पंच परिवर्तन की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसमें सामाजिक समरसता ,जाति, वर्ग और संप्रदाय से ऊपर उठकर समाज को एकसूत्र में बांधना है ऐसा मार्गदर्शन वक्ताओं द्वारा दिया गया तथा कुटुंब प्रबोधन – परिवार को संस्कारों का केंद्र बनाना, पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाना। 

स्वदेशी जीवनशैली अपना कर  स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना, नागरिक कर्तव्य व अनुशासन का पालन करना, राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना।
वक्ताओं ने युवाओं से आग्रह किया कि वे इन पंच परिवर्तनों को अपने दैनिक जीवन में उतारें।

सम्मेलन में शामिल युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न सत्रों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, सेवा, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का संचार किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास कर उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। आयोजकों ने बताया कि संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आगे भी जिलेभर में ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।


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