छात्राओं को बताए बाल विवाह के दुष्प्रभाव
छिंदवाड़ा
11-Jan-26
छिंदवाड़ा
बाल विवाह प्रतिषेद अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह करना एवं करवाना कानूनन अपराध है । ऐसा करने वाले व्यक्ति पर दो लाख का जुर्माना एवं एक वर्ष की कठोर सजा का प्रावधान है । वही सामूहिक विवाह आयोजनों में अगर बाल विवाह की घटनाएं होती है तो आयोजकों के विरुद्ध भी सख्त कारवाई इस कानून के तहत सुनिश्चित की जाती है। बाल विवाह प्रतिषेध कानून भारत के सभी नागरिकों पर लागू है इसलिए कोई सम्प्रदाय विशेष इस कानून से परे होने का दावा कोई नही कर सकता है। स्थानीय एम एल बी परिसर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की छात्राओं को बाल विवाह के दुष्परिणाम पर जागरूकता कार्यक्रम में यह बात बताई गई।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता श्यामाल राव ने स्वयं सेवको को बताया की हर जिले में बाल विवाह प्रतिषेध कानून के तहत एक अधिकारी को प्रभारी बनाया गया है जिसे बाल विवाह के मामले में पुलिस की तरह गिरफ्तारी तक के अधिकार प्रावधान है । बाल विवाह की सूचना के लिए टोल फ्री नम्बर 181,112, ओर1098 पर दे सकते,सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाता है।
रासेयो कार्यक्रम अधिकारी निहारिका शिवकर ने बाल विवाह करने के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुये कहा की इन दुष्प्रभाव के कारण हमारे जन्मे बच्चों पर भी बुरा असर देखने को मिलता है। इस बाल अवस्था में हम अपनी, शिक्षा, एवं स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता है।
आयोजन उपरांत उपस्थित छात्र छात्राओं ,को बाल विवाह रोकने शपथ दिलाई । आयोजन को सफल बनाने में महिला एवं बाल विकास विभाग की रजनी स्वामी, एम एस डब्ल्यू की छात्रा रोशनी खंडाते का सराहनीय सहयोग रहा ।