14 हजार पशु पालकों से ली जाएगी दूध और पशु की जानकारी
कृषि जगत
08-Jul-26
9 विकासखंडों के 242 सर्वेक्षकों की तैनाती, 13 से 18 जुलाई तक चलेगा अभियान
छिन्दवाडा
मध्यप्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देशानुसार जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने एवं पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का तृतीय चरण 13 जुलाई से 18 जुलाई तक संचालित किया जाएगा। उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. एच.जी.एस. पक्षवार ने बताया कि अभियान के अंतर्गत जिले के सभी 9 विकासखंडों में कुल 14,226 पशुपालक परिवारों तक विभागीय मैदानी अमला पहुंचकर सर्वेक्षण, मार्गदर्शन एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित करेगा।
2374 परिवारों का एक दिन में होगा सर्वे
उन्होंने बताया कि अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले में कुल 242 सर्वेक्षकों की तैनाती की गई है। प्रत्येक सर्वेक्षक प्रतिदिन 10 परिवारों का गृह भ्रमण करेगा, जिसके अनुसार प्रतिदिन लगभग 2,374 परिवारों तक पहुंचकर विभागीय टीम सर्वेक्षण एवं जनजागरूकता का कार्य करेगी। अभियान के अंतर्गत चौरई, अमरवाड़ा, परासिया, छिंदवाड़ा, हर्रई, मोहखेड़, जामई, बिछुआ एवं तामिया विकासखंडों में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य किया जाएगा।
घर-घर पहुंचकर दी जाएगी उन्नत जानकारी
अभियान के तीसरे चरण में विशेष रूप से ऐसे लघु पशुपालकों को शामिल किया गया है जिनके पास 3 से 4 गौवंश अथवा भैंसवंश पशु हैं। विभागीय मैदानी अमला घर-घर पहुंचकर पशुपालकों से सीधे संवाद स्थापित करेगा तथा उन्हें नस्ल सुधार, संतुलित पशु पोषण, हरे चारे के बेहतर प्रबंधन, पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं नियमित टीकाकरण सहित वैज्ञानिक पशुपालन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी देगा।
जिला स्तर पर बना कंट्रोल रूम
उपसंचालक डॉ. पक्षवार ने बताया कि अभियान की प्रभावी निगरानी एवं दैनिक समीक्षा के लिए जिला स्तर पर विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कंट्रोल रूम के प्रभारी के रूप में नोडल अधिकारी डॉ.छत्रपाल टांडेकर तथा सहायक के रूप में श्री रितेश एफ्रेम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर स्मार्ट पंचायत के माध्यम से अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य शासन के निर्देशानुसार पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ एवं पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र के न्यूनतम 5 प्रतिशत पशुपालकों तथा 10 गांवों का अनिवार्य रूप से भौतिक सत्यापन एवं मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।