लोक मर्यादा का पालन करना जरूरी, भक्ति में अपार शक्ति: नागेंद्र ब्रह्मचारी जी
छिंदवाड़ा
04-Sep-26
शिव-पार्वती विवाह और भगवान श्रीराम के जन्म की कथा ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

छिंदवाड़ा
स्थानीय मुख्य डाकघर के सामने स्थित अनगढ़ हनुमान मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित संगीतमयी दिव्य श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान में सराबोर हो रहे हैं। कथा के तीसरे दिन भगवताचार्य महामंडलेश्वर नागेंद्र ब्रह्मचारी जी ने भगवान शिव-पार्वती विवाह, भगवान श्रीराम जन्म सहित अनेक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान ब्रह्मचारी जी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में लोक मर्यादा का पालन अत्यंत आवश्यक है। भगवान की भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि सच्चे भक्त की भावना को परमात्मा स्वीकार करते हैं। उन्होंने राजा परीक्षित और सुखदेव जी के संवाद के माध्यम से भक्ति, धर्म और मर्यादा के महत्व को समझाया। कथावाचन में चित्रकूट की पवित्र मंदाकिनी गंगा, माता अनुसुईया की महिमा तथा अत्रि ऋषि के आश्रम का प्रसंग भी सुनाया गया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने भी माता अनुसुईया की भक्ति एवं तपस्या की महिमा को स्वीकार किया। इसी क्रम में भगवान दत्तात्रेय एवं भगवान दुर्वासा के प्राकट्य की कथा का भी वर्णन किया गया।
भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वहीं भगवान नारायण के भगवान श्रीराम के रूप में माता कौशल्या की गोद में जन्म लेने की कथा ने कथा स्थल का वातावरण भक्तिमय कर दिया। ब्रह्मचारी जी ने गंगा अवतरण की कथा सुनाते हुए बताया कि माता गंगा पृथ्वी पर प्राणियों के उद्धार के लिए अवतरित हुईं। इसके साथ ही गोमती जी की महिमा और ध्रुव चरित्र सहित अनेक धार्मिक एवं प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया गया।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं से श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक एवं पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया गया। कथा के समापन पर भगवान की आरती की गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया।