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भाजपा के राज में अस्पताल और मरीज सब बेहाल: कांग्रेस

भाजपा के राज में अस्पताल और मरीज सब बेहाल: कांग्रेस
छिंदवाड़ा
05-May-26
आईसीयू में पर्याप्त डॉक्टर व सुविधाओं का अभाव

छिन्दवाड़ा

भाजपा की तीन इंजन वाली सरकार में अस्पताल बाहर और अंदर दोनों तरफ से असुरक्षित है। चौतरफा परेशानियां और समस्याएं है। आम आदमी से लेकर खास तक और स्वस्थ से लेकर मरीज तक सभी परेशान है। इसका नमूना जिला अस्पताल है जहां स्वास्थ्य सेवाएं स्ट्रेचर पर आ चुकी है। हाल-ए- स्वास्थ्य विभाग, भाजपा के राज में अस्पताल और मरीज सब बेहाल। जिला अस्पताल की ऐसी कोई यूनिट नहीं जहां अव्यवस्थाओं का अम्बार ना लगा हो, लेकिन जिम्मेदार है कि ध्यान देने को तैयार नहीं। इस भीषण गर्मी के दौर में मरीज के परिजन पेयजल के लिए भटक रहे। उक्त उदगार कांग्रेस के जिला प्रवक्ता नितिन उपाध्याय ने बिगड़ी हुई स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठाते हुए व्यक्त किए।

जारी बयान में उन्होंने आगे कहा कि जिला अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह से ठप्प पड़ी है, जिसके कारण अक्सर देखने में आता है कि इमरजेंसी में मरीजों को पर्याप्त व समय पर इलाज नहीं मिल पाता। आईसीयू जैसे संघन चिकित्सा यूनिट में डॉक्टरों की कमी के साथ ही सुविधाओं का अभाव आम बात हो चुकी है जिसके चलते मरीजों की मौत और परिजनों का गुस्सा स्वास्थ्य सेवाओं पर फूट रहा, लेकिन सरकार जगाने को तैयार नहीं। स्थानीय जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है। इन हालातों में सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि जो आए दिन स्वास्थ्य शिविर में मरीजों के इलाज का श्रेय लेने के लिए बड़े-बड़े दांवे और आंकड़े प्रस्तुत करते हैं वहां क्या और किस स्तर का इलाज होता होगा। अगर वहां इलाज हो जाता है तो फिर जिले के दूरदराज से मरीज जिला अस्पताल पहुंचकर पुनरू अव्यवस्था का शिकार क्यों होते हैं ?

श्री उपाध्याय ने जारी बयान में आगे कहा कि मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ ने जिला अस्पताल को अत्याधुनिक मशीन से लेकर हर संभव व आवश्यक मदद की है, लेकिन उनका सही ढंग से संचालन व उपयोग वर्तमान सरकार नहीं कर पा रही, हां यह बात जरूर है कि इस बीच मामूली सुधार अथवा सुधार की गुंजाइश यहां नजर आ जाए तो श्रेय लेने वाले तालियां पीटने से जरा भी नहीं चूकते। लेकिन अभी अव्यवस्थाओं पर उनकी जुबान नहीं खुल रही। इसका सीधा अर्थ है कि भाजपा के जिम्मेदारों को सिर्फ श्रेय नजर आता है सुधार के लिए बोलना उन्हें नहीं आता।
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