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प्रदेश की राजधानी भोपाल को भिखारियों से मुक्त करने प्रयास शुरू

प्रदेश की राजधानी भोपाल को भिखारियों से मुक्त करने प्रयास शुरू
मध्यप्रदेश
02-Jul-25
3 फरवरी को भिक्षावृत्ति करने व भिक्षा देने पर लगाए गए थे प्रतिबंध

भोपाल (डिजीटल डेस्क)

प्रदेश की राजनीति भोपाल में ये तो नहीं पता की कितने भिखारी शहर में भीख मांग कर अपना पेट भरते हैं लेकिन बहुत जल्दी ये शहर भिखारियों से मुक्त हो जाएगा। प्रदेश सरकार इस ओर गंभीरता से प्रयास कर रही है। इसके लिए सरकार ने निजी संस्थाओं से प्रस्ताव बुलाए है।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की SMILE उपयोजना के तहत भोपाल जिला को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के उद्देश्य से चयनित किया गया है। भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास हेतु विशेष रूप से आश्रय स्थल अथवा भिक्षुक गृह की स्थापना की जाना है। इस आश्रय स्थल के संचालन के लिए अनुभवी और सक्षम स्वैच्छिक संस्थाओं और संगठनों से 15 जुलाई शाम 5 बजे तक प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर भोपाल द्वारा 3 फरवरी 2025 को भिक्षावृत्ति करने व भिक्षा देने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया है।


संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय ने बताया कि वही संस्थाएं आवेदन कर सकती है जो  सोसायटी रजिस्ट्रेशन/फर्म/लोक न्यास अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हो। वर्तमान वैध कार्यकारिणी हो। कार्यकारिणी द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया हो। संस्था किसी विभाग द्वारा ब्लैकलिस्टेड न हो। विगत 5 वर्षों से पुनर्वास संबंधित कार्य का अनुभव हो। वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हो (पिछले 3 वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट आवश्यक)। संस्था के उपविधियों में भिक्षावृत्ति पुनर्वास संबंधी उद्देश्य शामिल होना आवश्यक है।

इच्छुक संस्थाएँ अपना प्रस्ताव संयुक्त संचालक, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, शेड नं. 01, कमिश्नर कार्यालय के पीछे, पुराना सचिवालय, भोपाल में डाक, स्वयं उपस्थित होकर, या ईमेल (pswbho@mp.nic.in) के माध्यम से भेज सकती है।
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