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कोई मुगालते में न रहे, हार कभी भी हो सकती है

कोई मुगालते में न रहे, हार कभी भी हो सकती है
लेख
04-Aug-26
समीक्षक: राम कुमार विश्वकर्मा

उपचुनाव के परिणाम चेतावनी है जो वर्तमान में सत्तासीन है। राजनीति में सत्तासीन नेताओं को अक्सर यह भ्रम होने लगता है कि सत्ता केवल उनके लिए ही बनी है। वे भूल जाते हैं कि सत्ता के शिखर तक पहुंचाने में सबसे बड़ा योगदान आम जनता और संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं का होता है। जब सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, जब कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होने लगती है और जनता की समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं, तभी सत्ता की नींव कमजोर होने लगती है।

इतिहास गवाह है कि लोकतंत्र में जनता अंतिम निर्णायक होती है। जब उसे लगता है कि जनप्रतिनिधि जनसेवक की बजाय सत्ता के उपभोग में अधिक व्यस्त हैं, तो वह चुनाव के समय चुपचाप अपना फैसला सुना देती है। हाल ही में दतिया में देखने को मिला कि वर्षों तक सत्ता का आनंद लेने वाले नेताओं को जनता ने बाहर का रास्ता दिखाते हुए विपक्ष को अवसर दे दिया।

छिंदवाड़ा में भी इस तरह का इतिहास दोहराया जा चुका है और वर्तमान परिस्थितियां फिर एक बार उसी इतिहास को दोहराने का संकेत दे रही है। छिंदवाड़ा में भी कई मुद्दों को लेकर लोगों के बीच असंतोष की चर्चा सुनाई दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की समस्याएं तो शहर में पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती आम जनता अवसर की तलाश में है। प्रशासनिक जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली लगातार चर्चा में हैं। यदि इन मुद्दों का समय रहते समाधान नहीं हुआ तो राजनीतिक समीकरण बदलने में देर नहीं लगेगी।

लोकतंत्र में कोई भी सीट स्थायी नहीं होती और कोई भी दल अजेय नहीं होता। जनता उम्मीदों के साथ जनादेश देती है और अपेक्षाएं पूरी न होने पर वही जनता बदलाव का रास्ता भी चुन लेती है। सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना होगा कि चुनाव केवल संगठन या संसाधनों से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से जीते जाते हैं।

आने वाले चुनाव चाहे जब हों, आज से किया गया काम ही उस समय का परिणाम तय करेगा। इसलिए सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों के लिए यह समय आत्ममंथन का है। जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले परिणाम चाहती है। जनता ही असली ताकत है इसलिए कोई भी दल या नेता इस मुगालते में न रहे कि उसकी हार कभी नहीं हो सकती। राजनीति में जीत और हार दोनों स्थायी नहीं होतीं; स्थायी होती है केवल जनता की अदालत।
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