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जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पारित: बंटी विवेक साहू

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पारित: बंटी विवेक साहू
राजनीति
05-Aug-26
जन्म और मृत्यु का सही रिकॉर्ड बनेगा, देश के विकास को मिलेगी नई दिशा

छिन्दवाड़ा

मंत्रालय के प्रमुख विभाग कंज्यूमर अफेयर फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन और कोयला मंत्रालय संसदीय सलाहकार समिति के सदस्य एवं सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि संसद ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में संशोधन करना है। नया विधेयक विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाने और जन्म तथा मृत्यु की घटनाओं की समय पर सूचना देने को प्रोत्साहित करने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत सार्वभौमिक और सटीक जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

पंजीकरण में होने वाले हेर-फेर पर लगेगी रोक

सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि विधेयक में प्रावधान है कि यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना पंजीयक को उसके घटित होने के एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो जन्म या मृत्यु की प्रामाणिकता के सत्यापन के बाद ही जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की स्वीकृति से इसका पंजीकरण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य स्पष्ट है, क्योंकि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे का विधिवत पंजीकरण हो। इसका उद्देश्य जन्मों के अनुचित पंजीकरण या निहित स्वार्थों के लिए किये जाने वाले हेरफेर जैसी अनियमितताओं को रोकना भी है।

देश में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का आकंड़ा बढ़ा

सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि इसी प्रकार प्रत्येक मृत्यु को भी समय पर विधिवत दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि अभिलेखों में दुरुपयोग या अनियमितताओं की कोई गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा कि देशभर में लगभग 35 लाख पंजीकरण इकाइयां कार्यरत हैं। देश में 2014 में जन्म पंजीकरण लगभग 86.6 प्रतिशत था, जो 2024 में बढ़कर 99 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसी प्रकार मृत्यु पंजीकरण लगभग 72.5 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 99.4 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत की नागरिक पंजीकरण प्रणाली ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि 2000 से पहले केवल लगभग 56 प्रतिशत जन्म और 48 प्रतिशत मृत्यु ही राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत होती थीं। सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि एक विश्वसनीय नागरिक पंजीकरण प्रणाली न केवल कानूनी पहचान के लिए बल्कि प्रभावी शासन, नीति नियोजन और सार्वजनिक सेवाओं के वितरण के लिए भी आवश्यक है।

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