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जल गंगा संवर्धन अभियान में छिंदवाड़ा बी ग्रेड में रहा पीछे, परासिया-तामिया फिसड्डी, लेकिन शालीवाड़ा तालाब बना मिसाल

जल गंगा संवर्धन अभियान में छिंदवाड़ा बी ग्रेड में रहा पीछे, परासिया-तामिया फिसड्डी, लेकिन शालीवाड़ा तालाब बना मिसाल
छिंदवाड़ा
29-Jun-25
छिंदवाड़ा
जल संरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश भर में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में छिंदवाड़ा ज़िला तमाम प्रयासों के बावजूद ए ग्रेड हासिल करने से चूक गया। जिले को 100 में से 69.52 अंक मिले, जिससे वह केवल बी ग्रेड में ही स्थान बना पाया। यह अभियान 30 जून तक चल रहा है।


जिला प्रशासन के तमाम प्रयास बेअसर

पिछले दो महीनों से जिले भर में नदी-नालों के किनारे बोर्ड लगाकर, जल संरक्षण की शपथ दिलाने, नदी स्रोतों की सफाई, पॉलीथिन हटाने जैसे कई प्रयास किए गए। कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने भी समीक्षा के दौरान जनपद पंचायतों के सीईओ को कई बार नोटिस जारी किए और नाराज़गी व्यक्त की। इसके बावजूद प्रदर्शन में सुधार नहीं हो सका।
ब्लॉक स्तर पर बिछुआ अव्वल, परासिया और तामिया सबसे पीछे
ब्लॉकवाइज आंकड़ों में बिछुआ (79.34) और चौरई (78.25) ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि परासिया (64.25) और तामिया (64.68) सबसे निचले पायदान पर रहे। कलेक्टर ने परासिया और तामिया के जनपद सीईओ की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर करते हुए वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।

फार्म पॉन्ड और डगवेल में भी औसत प्रदर्शन

छिंदवाड़ा को फार्म पॉन्ड निर्माण में 16.20 अंक और डगवेल (कुएं) में 18.48 अंक मिले, जो कि ए ग्रेड के लिए अपर्याप्त रहे।

अन्य जिले छिंदवाड़ा से आगे

इस अभियान में खंडवा, रायसेन और बालाघाट जैसे जिले छिंदवाड़ा से आगे निकल गए हैं। खंडवा की जल संरक्षण पहल की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं प्रशंसा कर चुके हैं।

शालीवाड़ा तालाब बना प्रेरणा का स्रोत

अभियान के अंतर्गत परासिया विकासखंड के ग्राम शालीवाड़ा शारदा में वर्षों से सूखा पड़ा तालाब ग्रामीणों की मेहनत से जल से लबालब हो गया।
यह तालाब झाड़ियों, कचरे और पॉलीथिन से पट गया था। ग्राम पंचायत, पीएचई विभाग और ग्रामवासियों के श्रमदान से तालाब की गहराई बढ़ाई गई, नालों की सफाई कर वर्षा जल का प्रवाह तालाब तक पहुंचाया गया।
अब वहां का तालाब पानी से भर चुका है, सिंचाई के लिए उपयोगी, हैंडपंप रीचार्ज, और भूजल स्तर में वृद्धि हुई है। गांव में हरियाली लौट आई है और किसान खुश हैं।
"जहां जल, वहां कल" को साकार करती यह पहल न सिर्फ एक तालाब, बल्कि पूरे गांव की सोच और भविष्य को बदलने वाली मिसाल बन चुकी है।

जहां एक ओर जिला स्तर पर छिंदवाड़ा पिछड़ गया, वहीं ग्राम स्तर पर शालीवाड़ा शारदा जैसे गांवों ने उदाहरण पेश किया है कि यदि जनभागीदारी और इच्छाशक्ति हो, तो जल संरक्षण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। अब जरूरत है पूरे जिले को इसी सोच के साथ आगे बढ़ाने की।
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