भोपाल फ्लाईओवर विवाद: 90 डिग्री मोड़ पर बवाल, आठ इंजीनियर निलंबित, निर्माण एजेंसी ब्लैकलिस्ट
मध्यप्रदेश
29-Jun-25
भोपाल
राजधानी भोपाल में बना ऐशबाग आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) अपने 90 डिग्री के तीव्र मोड़ को लेकर इन दिनों देशभर में सुर्खियों में है। अब इस गंभीर लापरवाही के मामले में सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के 8 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक सेवानिवृत्त अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। साथ ही निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
कौन-कौन इंजीनियर हुए निलंबित?
जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर दो मुख्य अभियंता (CE) – जी.पी. वर्मा और संजय खांडे, दो कार्यपालन यंत्री – जावेद शकील और श्रीमती शबाना रज्जाक (डिजाइन), एक सहायक यंत्री – शानुल सक्सेना (डिजाइन), अनुभागीय अधिकारी – रवि शुक्ला और उपयंत्री – उमाशंकर मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एम.पी. सिंह पर विभागीय जांच शुरू की जा रही है।
डिजाइन खामियों की वजह से गिरी गाज
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐशबाग आरओबी का निर्माण बेहद त्रुटिपूर्ण डिजाइन के आधार पर किया गया, जिससे यातायात में गंभीर खतरे की आशंका है। फ्लाईओवर के मोड़ की तीव्रता और स्पेस मैनेजमेंट में की गई गड़बड़ियां इसकी सबसे बड़ी खामी मानी जा रही हैं। इस कारण निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट को काली सूची में डाल दिया गया है।
सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ने दी जानकारी
डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, "ऐशबाग आरओबी निर्माण में हुई खामियां अत्यंत गंभीर हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। जिम्मेदार एजेंसी और कंसल्टेंट पर कठोर कार्रवाई की जा चुकी है।" उन्होंने यह भी कहा कि जब तक सभी सुधार कार्य पूर्ण नहीं हो जाते, आरओबी का लोकार्पण नहीं किया जाएगा।
सुधार के लिए बनी विशेष कमेटी
फ्लाईओवर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि आवश्यक तकनीकी सुधार कार्यों के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। यह समिति ब्रिज की संरचना और सुरक्षा का दोबारा मूल्यांकन करेगी।
रेलवे ने डिजाइन पहले ही कर दिया था अस्वीकार
मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि रेलवे विभाग ने 2018 में प्रस्तुत प्रारंभिक डिजाइन को अस्वीकार कर दिया था। रेलवे की आपत्ति के बाद 120 डिग्री के कोण पर पुनः निर्माण प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसमें सर्कुलर पिलर प्रस्तावित थे। लेकिन बाद में रेलवे ने दीवारनुमा पिलर बना दिए, जिससे डिजाइन में बदलाव के चलते कम स्थान में फ्लाईओवर बनाना मजबूरी बन गया।
रेलवे ने PWD को पहले ही चेताया था
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने PWD को पहले ही चेताया था कि ऐसी डिजाइन से समस्या हो सकती है। इंडियन रोड कांग्रेस के कोड के अनुसार, यदि किसी शहरी क्षेत्र में भूमि की कमी हो, तो न्यूनतम 30 किमी/घंटा गति से यातायात संचालन योग्य ब्रिज डिजाइन किया जा सकता है। मगर भोपाल के ऐशबाग आरओबी में यह मानक भी नहीं अपनाया गया।
भोपाल के इस विवादास्पद फ्लाईओवर ने इंजीनियरिंग लापरवाही, नौकरशाही उदासीनता और तकनीकी चूक का बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। सरकार की कार्रवाई को लेकर उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों में अधिक पारदर्शिता और गुणवत्ता का पालन किया जाएगा।
राजधानी भोपाल में बना ऐशबाग आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) अपने 90 डिग्री के तीव्र मोड़ को लेकर इन दिनों देशभर में सुर्खियों में है। अब इस गंभीर लापरवाही के मामले में सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के 8 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक सेवानिवृत्त अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। साथ ही निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
कौन-कौन इंजीनियर हुए निलंबित?
जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर दो मुख्य अभियंता (CE) – जी.पी. वर्मा और संजय खांडे, दो कार्यपालन यंत्री – जावेद शकील और श्रीमती शबाना रज्जाक (डिजाइन), एक सहायक यंत्री – शानुल सक्सेना (डिजाइन), अनुभागीय अधिकारी – रवि शुक्ला और उपयंत्री – उमाशंकर मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एम.पी. सिंह पर विभागीय जांच शुरू की जा रही है।
डिजाइन खामियों की वजह से गिरी गाज
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐशबाग आरओबी का निर्माण बेहद त्रुटिपूर्ण डिजाइन के आधार पर किया गया, जिससे यातायात में गंभीर खतरे की आशंका है। फ्लाईओवर के मोड़ की तीव्रता और स्पेस मैनेजमेंट में की गई गड़बड़ियां इसकी सबसे बड़ी खामी मानी जा रही हैं। इस कारण निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट को काली सूची में डाल दिया गया है।
सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ने दी जानकारी
डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, "ऐशबाग आरओबी निर्माण में हुई खामियां अत्यंत गंभीर हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। जिम्मेदार एजेंसी और कंसल्टेंट पर कठोर कार्रवाई की जा चुकी है।" उन्होंने यह भी कहा कि जब तक सभी सुधार कार्य पूर्ण नहीं हो जाते, आरओबी का लोकार्पण नहीं किया जाएगा।
सुधार के लिए बनी विशेष कमेटी
फ्लाईओवर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि आवश्यक तकनीकी सुधार कार्यों के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। यह समिति ब्रिज की संरचना और सुरक्षा का दोबारा मूल्यांकन करेगी।
रेलवे ने डिजाइन पहले ही कर दिया था अस्वीकार
मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि रेलवे विभाग ने 2018 में प्रस्तुत प्रारंभिक डिजाइन को अस्वीकार कर दिया था। रेलवे की आपत्ति के बाद 120 डिग्री के कोण पर पुनः निर्माण प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसमें सर्कुलर पिलर प्रस्तावित थे। लेकिन बाद में रेलवे ने दीवारनुमा पिलर बना दिए, जिससे डिजाइन में बदलाव के चलते कम स्थान में फ्लाईओवर बनाना मजबूरी बन गया।
रेलवे ने PWD को पहले ही चेताया था
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने PWD को पहले ही चेताया था कि ऐसी डिजाइन से समस्या हो सकती है। इंडियन रोड कांग्रेस के कोड के अनुसार, यदि किसी शहरी क्षेत्र में भूमि की कमी हो, तो न्यूनतम 30 किमी/घंटा गति से यातायात संचालन योग्य ब्रिज डिजाइन किया जा सकता है। मगर भोपाल के ऐशबाग आरओबी में यह मानक भी नहीं अपनाया गया।
भोपाल के इस विवादास्पद फ्लाईओवर ने इंजीनियरिंग लापरवाही, नौकरशाही उदासीनता और तकनीकी चूक का बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। सरकार की कार्रवाई को लेकर उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों में अधिक पारदर्शिता और गुणवत्ता का पालन किया जाएगा।