छिंदवाड़ा में गरीबों के राशन से गायब हुआ चावल, सिर्फ गेहूं और नमक ही मिल रहा; राशन दुकानों के चक्कर काट रहे हितग्राही
छिंदवाड़ा
29-Jun-25
छिंदवाड़ा
अंत्योदय अन्न योजना के तहत गरीबों को मिलने वाले राशन में इस बार चावल नहीं दिया जा रहा, जिससे हजारों हितग्राहियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी राशन दुकानों पर केवल गेहूं और नमक दिया जा रहा है, जबकि चावल का स्टॉक नदारद है।
चावल के बिना अधूरा राशन
इस बार केंद्र सरकार द्वारा बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए तीन माह का राशन एकमुश्त देने की योजना बनाई गई है, ताकि लोगों को मौसम की मार से राहत मिल सके। लेकिन छिंदवाड़ा जिले में यह योजना आधी-अधूरी साबित हो रही है, क्योंकि वितरण व्यवस्था की लचर हालत के चलते चावल की आपूर्ति अब तक नहीं हो सकी है।
राशन दुकानों के चक्कर काट रहे लोग
अंत्योदय योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को मुफ्त में अनाज उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन इस बार चावल न मिलने से हजारों परिवारों की रसोई पर असर पड़ा है। जिले के कई क्षेत्रों, विशेषकर पांढुर्ना और छिंदवाड़ा ब्लॉक में राशन वितरण प्रभावित हुआ है। राशन दुकानों में स्टॉक खत्म हो चुका है और चावल का परिवहन भी समय पर नहीं हो पा रहा है।
वितरण प्रणाली चरमराई, जवाबदेही तय नहीं
छिंदवाड़ा जिले की राशन आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। हितग्राही बार-बार दुकानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ "आएगा तो देंगे" जैसे जवाब मिल रहे हैं। वितरण में देरी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते जनता का भरोसा डगमगाने लगा है।
जरूरी सवाल
जब केंद्र से तीन माह का राशन भेजा जा रहा है तो चावल की आपूर्ति में देरी क्यों?
कौन जिम्मेदार है इस अव्यवस्था के लिए – वितरण एजेंसी, परिवहन विभाग या जिला प्रशासन?
बरसात के समय जब गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा राहत की जरूरत होती है, तब चावल जैसे मुख्य खाद्यान्न का अभाव क्यों?
छिंदवाड़ा जिले में गरीबों के हक के चावल की आपूर्ति रुकना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि सामाजिक असंवेदनशीलता भी दर्शाता है। शासन की नीतियां तभी कारगर होंगी, जब उन्हें जमीन पर सही ढंग से लागू किया जाए। जरूरत है कि प्रशासन जल्द से जल्द चावल की सप्लाई बहाल करे, ताकि गरीबों के राशन में कोई कटौती न हो और योजना का लाभ उन्हें समय पर मिल सके।
अंत्योदय अन्न योजना के तहत गरीबों को मिलने वाले राशन में इस बार चावल नहीं दिया जा रहा, जिससे हजारों हितग्राहियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी राशन दुकानों पर केवल गेहूं और नमक दिया जा रहा है, जबकि चावल का स्टॉक नदारद है।
चावल के बिना अधूरा राशन
इस बार केंद्र सरकार द्वारा बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए तीन माह का राशन एकमुश्त देने की योजना बनाई गई है, ताकि लोगों को मौसम की मार से राहत मिल सके। लेकिन छिंदवाड़ा जिले में यह योजना आधी-अधूरी साबित हो रही है, क्योंकि वितरण व्यवस्था की लचर हालत के चलते चावल की आपूर्ति अब तक नहीं हो सकी है।
राशन दुकानों के चक्कर काट रहे लोग
अंत्योदय योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को मुफ्त में अनाज उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन इस बार चावल न मिलने से हजारों परिवारों की रसोई पर असर पड़ा है। जिले के कई क्षेत्रों, विशेषकर पांढुर्ना और छिंदवाड़ा ब्लॉक में राशन वितरण प्रभावित हुआ है। राशन दुकानों में स्टॉक खत्म हो चुका है और चावल का परिवहन भी समय पर नहीं हो पा रहा है।
वितरण प्रणाली चरमराई, जवाबदेही तय नहीं
छिंदवाड़ा जिले की राशन आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। हितग्राही बार-बार दुकानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ "आएगा तो देंगे" जैसे जवाब मिल रहे हैं। वितरण में देरी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते जनता का भरोसा डगमगाने लगा है।
जरूरी सवाल
जब केंद्र से तीन माह का राशन भेजा जा रहा है तो चावल की आपूर्ति में देरी क्यों?
कौन जिम्मेदार है इस अव्यवस्था के लिए – वितरण एजेंसी, परिवहन विभाग या जिला प्रशासन?
बरसात के समय जब गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा राहत की जरूरत होती है, तब चावल जैसे मुख्य खाद्यान्न का अभाव क्यों?
छिंदवाड़ा जिले में गरीबों के हक के चावल की आपूर्ति रुकना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि सामाजिक असंवेदनशीलता भी दर्शाता है। शासन की नीतियां तभी कारगर होंगी, जब उन्हें जमीन पर सही ढंग से लागू किया जाए। जरूरत है कि प्रशासन जल्द से जल्द चावल की सप्लाई बहाल करे, ताकि गरीबों के राशन में कोई कटौती न हो और योजना का लाभ उन्हें समय पर मिल सके।