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भाजपा सांसद ना राम के हैं, ना आम के हैं, ना ही किसी काम के है: नीलेश उइके

भाजपा सांसद ना राम के हैं, ना आम के हैं, ना ही किसी काम के है: नीलेश उइके
छिंदवाड़ा
02-Jul-25
भाजपा सरकार ने दादा धाम एक्सप्रेस बंद करने का पाप किया
 
छिन्दवाड़ा

छिंदवाड़ा सांसद की धार्मिक यात्रा को लेकर पांढुर्णा के विधायक नीलेश उईके ने तंज भरे लहजे में कहा कि भाजपा सांसद ना राम के है, ना आम के है, ना ही किसी काम के है।  बुधवार को कांग्रेस कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में पंाढुर्णा विधायक नीलेश उईके ने कहा कि  मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ  एवं जिले के पूर्व सांसद  नकुलनाथ के प्रयासों से दादा धाम एक्सप्रेस ट्रेन का स्टॉपेज पांढुर्ना रेलवे स्टेशन पर था, किन्तु भाजपा ने इस स्टपेज को बंद करने का सबसे बड़ा पाप किया है। छिन्दवाड़ा व पांढुर्ना जिले के हजारों श्रद्धालुगण दादा धाम एक्सप्रेस से धूनी वाले दादा के दरबार आसानी से पहुंचते थे। भाजपा के सांसद उनकी पार्टी के सभी शीर्ष नेतृत्व के पास आवेदन व निवेदन कर आए फिर भी एक ट्रेन का स्टॉपेज प्रारंभ नहीं करा पाए इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा के सांसद छिन्दवाड़ा संसदीय क्षेत्र का कितना विकास कर सकते हैं, ये केवल राजनीतिक यात्रा कर सकते हैं, क्योंकि ये ना राम के हैं, ना ही आम के हैं और ना ही किसी काम के हैं। 



उन्होंने कहा कि भाजपा के तीनों इंजन कबाड़ा हो चुके हैं। कहते थे दो इंजन वाली सरकार में छिन्दवाड़ा से तीसरा इंजन जुड़ेगा तो विकास होगा, विकास तो हुआ नहीं विकास का कबाड़ जरूर हो रहा है। कानून व्यवस्था बदहाल है, आम आदमी भ्रष्टाचार से परेशान है और छिन्दवाड़ा के भाजपा सांसद भगवान के नाम की यात्रा निकालकर राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।

श्री उइके ने आगे कहा कि गत माह एक यात्रा पूरी करने के उपरांत उन्होंने अपने पैर आदिवासियों से धुलवाए, अब खंडवा दादा धाम यात्रा पर संकल्प लेकर निकले तो सम्पूर्ण मार्ग के पंचायत भवनों व अन्य शासकीय कार्यालयों में शासकीय व्यय पर पूरे ठाट-बांट के साथ रात बिताई, गददे पर सोए, जबकि एक धार्मिक यात्रा पर निकलने वाला व्यक्ति सम्पूर्ण यात्रा मार्ग में सात्विक जीवन जीता है।

विधायक निलेश उइके ने जारी बयान में आगे कहा कि  छिन्दवाड़ा से भाजपा के सांसद ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में फूटी कौड़ी का भी विकास नहीं किया है, विकास की बात तो दूर जिन कार्यों को कमलनाथ एवं नकुलनाथ के द्वारा कराया है, उनका भी रखरखाव नहीं कर पा रहे हैं। केवल धर्म और आस्था के नाम पर यात्रा निकालकर राजनीतिक रोटियां सेंकने में जुटे हैं।
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