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बाल कलाकारों की भारत नाट्यम प्रस्तुति ने किया अचंभित

बाल कलाकारों की भारत नाट्यम प्रस्तुति ने किया अचंभित
छिंदवाड़ा
15-May-26
त्रिवेणी कलासंगम के वार्षिक उत्सव में नन्हे कलाकार पुरस्कृत

छिंदवाड़ा

शहर के कला प्रेमियों के लिए आज का दिन अविस्मरणीय रहा, जब ’मेडिकल कॉलेज के सभागार (टप्च् रोड)’ में ’कलासंगम इंस्टिट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स’ द्वारा आयोजित ’वार्षिक उत्सव एवं भरतनाट्यम वर्कशॉप उद्घाटन’ समारोह संपन्न हुआ। भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय कलाओं के इस अद्भुत संगम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व राज्यपाल श्रीमती अनुसुइया उइके और महापौर विक्रम अहाके, विशेष अतिथि के रूप में बालाजी स्कूल प्राचार्य श्रीमती अनुराधा नायडू उपस्थित रहे वहीं  कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष भारत डोले ने की। इस अवसर पर सम्माननीय अतिथियों में वरिष्ठ पत्रकार गोविंद चौरसिया, श्रीमती एस. ब्राउन, शशिकांत सरदेश पाण्डेय, दिनेश भट्ट, श्रीमती प्रीति डोले, श्रीमती नम्रता चंदेल और गुलाबचंद वात्सल्य जैसे प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे जिन्होंने कलाकारों का मनोबल बढ़ाया।

प्रतिभाशाली बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा दी गई भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां रहीं। नृत्य की बारीकियों और भाव-भंगिमाओं का सुंदर प्रदर्शन करने वाले कलाकारों में ’कृति भट्ट, ज्योति चारपे, निहारिका खसकलम, दीपा अवस्थी, नबनिता चक्रवर्ती, पल्लवी धुर्वे, अलीना पवार, गार्गी पाटिल, वैष्णवी बेलवंशी, रूपल मून, शाल्विका अवस्थी, अद्विका अवस्थी, गुंजन हलदर, मान्या पहाड़े, पूर्वी सिंह, अन्वी दामोदर, आन्या सिंह और आरोही राजपूत’ शामिल रहीं।

नृत्य के साथ-साथ श्रीराम संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों सौम्या शर्मा, तमन्ना पाटिल, मोहिनी अल्दक, मानसी धाकड़िया, प्रिया पालोरकर, शुभम वासुकी, रियांश भोयर, नियांश भारद्वाज, विनीत यादव, मान्या भोयर, विहाना निखाड़े, सर्वज्ञ बत्रा और अभिनव शुक्ला’ ने गुरु शशिकांत सरदेश पाण्डेय के मार्गदर्शन में अपनी सुरीली आवाज़ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

साधना और समर्पण का मार्ग

संस्थान के ’निदेशक अमित डोले’ ने बताया कि साधनमेव मोक्षस्य मार्गम् के ध्येय के साथ आज से 12 दिवसीय भरतनाट्यम वर्कशॉप की शुरुआत भी हो गई है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों की मेहनत और शास्त्रीय कला के प्रति समर्पण ही इस संस्थान की असली पहचान है। अंत में संस्थान प्रबंधन द्वारा सभी अतिथियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त किया गया।
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