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पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतों से महंगाई और बढ़ेंगी: नकुलनाथ

पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतों से महंगाई और बढ़ेंगी: नकुलनाथ
राजनीति
15-May-26
महंगाई के मुद्दे पर पूर्व सांसद ने भाजपा सरकार को घेरा

छिन्दवाड़ा

जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ ने पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतों पर केन्द्र सरकार को जमकर घेरते हुए कहा कि यह भाजपा सरकार के द्वारा निर्मित आपदा है जिससे देश, प्रदेश व जिले की जनता जूझ रही। महंगाई का असर पेट्रोल, डीजल या फिर अन्य सामग्री तक सीमित नहीं रहेगा, इसका समग्र असर जल्द ही दिखाई देगा। खाद्य पदार्थ भी महंगे होंगे जिसका सीधा असर आम व्यक्ति की जेब पर पड़ेगा और वह आर्थिक रूप से कमजोर होगा। महंगाई को रोकने के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है ना ही कोई दूरदृष्टि है जिसका दुष्परिणाम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव के समय कीमतों को कृत्रिम रूप से स्थित रखा गया और चुनाव खत्म होते ही जनता पर बढ़ी हुई कीमतों का बोझ़ डाल दिया।

चुनाव के समय भाजपा सरकार ने जानबूझकर पेट्रोल और डीजल सहित अन्य सामग्री के दामों को नियंत्रित कर रखा था। जबकि कांग्रेस ने सतत रूप से महंगाई की इस लहर की चेतावनी दी थी, जिसे भाजपा सरकार ने नजर अंदाज किया। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही सरकार ने जनता से महंगाई वसूलनी शुरू कर दी। पहले से ही महंगाई का सामना कर रहे नागरिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना सीधा आर्थिक अन्याय है।

छिन्दवाड़ा संसदीय क्षेत्र में पेट्रोल सामान्य के दामों में 3 रुपए 28 पैसे की मूल्य वृद्धि के साथ अब 111 रुपए 27 पैसे प्रति लीटर प्राप्त होगा वहीं पॉवर पेट्रोल प्रति लीटर 120 रुपए 57 पैसे का मिलेगा। डीजल पर सीधे 3.9 रुपए की वृद्धि के साथ 96.48 रुपए प्रति लीटर हो चुका है। इसके लिए सीधे भाजपा सरकार जिम्मेदार है जो आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हो चुकी है। 

डीज़ल महंगा होने से कृषि क्षेत्र और महंगा होगा, परिवहन के साथ ही रोज़मर्रा की हर सामग्री महंगी होगी। गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग हर दिन आर्थिक बोझ के नीचे दबता जा रहा है, लेकिन सरकार को जनता की तकलीफ नहीं, बल्कि सिर्फ़ टैक्स वसूली की चिंता है। महंगाई पर नियंत्रण करने में भाजपा सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। भाजपा सरकार ने जनता की जेब खाली करने और घर-घर का बजट बिगाड़ने का काम किया है। सरकार को पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी करने के बजाय इन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और वैट कम करना चाहिए, ताकि महंगाई से परेशान आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ ना पड़े।
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