छिंदवाड़ा में तिरोले कुनबी समाज द्वारा आषाढ़ी एकादशी पर हरिनाम सप्ताह का भव्य आयोजन
छिंदवाड़ा
06-Jul-25
भजनों से गूंजा समाज भवन
छिंदवाड़ा
पवित्र आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर तिरोले कुनबी समाज ने चंदनगांव स्थित समाज भवन में भव्य हरिनाम सप्ताह का आयोजन किया। रविवार को हुए इस आयोजन में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें समाज के 25 से 30 से अधिक भजन मंडलों ने भगवान विट्ठल और रुक्मिणी के भजनों की संगीतमयी प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भजनों की मंगलध्वनि के साथ हुई। मंच संचालन की जिम्मेदारी समाज के वरिष्ठ सदस्य पंजाबराव अवारे, देवराव ठाकरे, रामराव अवारे, सुरेश कराडे और भगवंतराव कराडे ने संभाली। भजनों की श्रृंखला में पारंपरिक वारकरी शैली से लेकर आधुनिक भक्तिगीतों तक की प्रस्तुतियाँ शामिल थीं, जिन्हें श्रोताओं ने तालियों और जयकारों के साथ सराहा।

समारोह की विशेषता रही समाज के अध्यक्ष चंद्रभान देवरे द्वारा दही लाही की मटकी फोड़ परंपरा का निर्वहन, जिसके बाद समाजजनों को प्रसाद वितरण किया गया। इस धार्मिक परंपरा ने समस्त उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री विट्ठल भक्ति की अनुभूति कराई।
कार्यक्रम के पश्चात एक भव्य दिंडी यात्रा का आयोजन किया गया, जो चंदनगांव से प्रारंभ होकर विवेकानंद कॉलोनी के साईं मंदिर होते हुए गजानन महाराज मंदिर तक पहुंची। इस दौरान श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में हरिनाम संकीर्तन करते हुए आगे बढ़ते गए। ढोल-ताशों और झांझ-मंजीरे की धुन पर भक्त झूमते दिखे। पूरी यात्रा में अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
समाज के अध्यक्ष चंद्रभान देवरे ने इस सफल आयोजन के लिए समाज के समस्त सहयोगियों—मातृ शक्ति, वरिष्ठ नागरिक संगठन, युवा संगठन तथा कार्यकारिणी सदस्यों—का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में एकता, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना को बल मिलता है।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिकता का प्रसार संभव है। आषाढ़ी एकादशी पर आयोजित यह हरिनाम सप्ताह आने वाले वर्षों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है।
छिंदवाड़ा
पवित्र आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर तिरोले कुनबी समाज ने चंदनगांव स्थित समाज भवन में भव्य हरिनाम सप्ताह का आयोजन किया। रविवार को हुए इस आयोजन में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें समाज के 25 से 30 से अधिक भजन मंडलों ने भगवान विट्ठल और रुक्मिणी के भजनों की संगीतमयी प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भजनों की मंगलध्वनि के साथ हुई। मंच संचालन की जिम्मेदारी समाज के वरिष्ठ सदस्य पंजाबराव अवारे, देवराव ठाकरे, रामराव अवारे, सुरेश कराडे और भगवंतराव कराडे ने संभाली। भजनों की श्रृंखला में पारंपरिक वारकरी शैली से लेकर आधुनिक भक्तिगीतों तक की प्रस्तुतियाँ शामिल थीं, जिन्हें श्रोताओं ने तालियों और जयकारों के साथ सराहा।

समारोह की विशेषता रही समाज के अध्यक्ष चंद्रभान देवरे द्वारा दही लाही की मटकी फोड़ परंपरा का निर्वहन, जिसके बाद समाजजनों को प्रसाद वितरण किया गया। इस धार्मिक परंपरा ने समस्त उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री विट्ठल भक्ति की अनुभूति कराई।
कार्यक्रम के पश्चात एक भव्य दिंडी यात्रा का आयोजन किया गया, जो चंदनगांव से प्रारंभ होकर विवेकानंद कॉलोनी के साईं मंदिर होते हुए गजानन महाराज मंदिर तक पहुंची। इस दौरान श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में हरिनाम संकीर्तन करते हुए आगे बढ़ते गए। ढोल-ताशों और झांझ-मंजीरे की धुन पर भक्त झूमते दिखे। पूरी यात्रा में अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
समाज के अध्यक्ष चंद्रभान देवरे ने इस सफल आयोजन के लिए समाज के समस्त सहयोगियों—मातृ शक्ति, वरिष्ठ नागरिक संगठन, युवा संगठन तथा कार्यकारिणी सदस्यों—का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में एकता, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना को बल मिलता है।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिकता का प्रसार संभव है। आषाढ़ी एकादशी पर आयोजित यह हरिनाम सप्ताह आने वाले वर्षों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है।