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86 प्रतिशत लोगों ने माना सरकारी कार्यालयों में रिश्वत से परेशानी

86 प्रतिशत लोगों ने माना सरकारी कार्यालयों में रिश्वत से परेशानी
छिंदवाड़ा
23-Feb-26
छिंदवाड़ा अपडेट जनमत का निष्कर्ष

समीक्षक: राम कुमार विश्वकर्मा

छिंदवाड़ा

नपाध्यक्ष परासिया का मामला लिया जाए या फिर सीएमएचओ में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटर का चारों तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला है। दोनों घटनाएं हाल ही में हुई जो बताती है कि चुने हुए जनप्रतिनिधि से लेकर सरकारी कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारी तक भ्रष्टाचार में डूबे हैं। 30 हजार से एक लाख प्रतिमाह कमाने वाले सरकारी कर्मचारी भी 3-4 सौ रूपए प्रतिदिन कमाने वाले गरीबों और मजदूरों से रिश्वत लिए बिना काम नहीं करते। लोकतंत्र में कोई ऐसा तंत्र नहीं है जो भ्रष्टाचार से अछूता है। ये बात अलग है की कुछ के मामले उजागर हो जाते हैं और कुछ के दब जाते हैं। मामला यही नहीं रूकता सरकारी महकमे में तो भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गए कर्मचारी स्वयं को दोषमुक्त करने के लिए बड़ी से बड़ी रिश्वत देने तक से बाज नहीं आते हैं इसके भी उदाहरण यदाकदा मीडिया की खबर बन जाते हैं कि फलां लोकायुक्त अधिकारी रिश्वत लेते हुए पकड़ाया। 

सरकार और प्रशासन में बैठे ईमानदार लोग भ्रष्टाचार मिटाने के लिए आम नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराते है जिनमें आरटीआई, लोकायुक्त जैसी सुविधाएं भी शामिल है लेकिन इसके बावजूद भी सरकारी कार्यालयों में रिश्वत का शिष्टाचार थम नहीं रहा है। पिछले दो माह में जिले में भ्रष्टाचार के दो मामले सामने आने पर हमने महसूस किया कि इस विषय पर जनमत सर्वे कराया जाए और पता लगाया जाए कि सचमुच आम जनता भ्रष्टाचार से कितनी परेशान है। तो आइए जानते है इस बार के ‘छिंदवाड़ा अपडेट जनमत’ में जनता ने किस विकल्प को कितना मत दिया।

विषय - सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी से क्या आप परेशान है :-
  • परेशान है                    86.4 प्रतिशत
  • परेशान नहीं                3.9 प्रतिशत
  • ठीक है                         2.9 प्रतिशत
  • कुछ कह नहीं सकते    6.8 प्रतिशत


‘छिंदवाड़ा अपडेट जनमत’ में आम नागरिकों द्वारा दिए गए मत से स्पष्ट है कि सरकारी कार्यालयों में  रिश्वतखोरी से लोग सबसे ज्यादा परेशान है। हमारा सभी पाठकों से अनुरोध है कि जागरूकता से ही भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है अतः न रिश्वत ले और न रिश्वत दें। यदि रिश्वत दिए  बिना काम नहीं हो रहा हो तो शिकायत करें। आप नीचे दिए गए नंबरों पर कॉल करके सरकारी कर्मचारियों द्वारा घूस मांगने या भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत कर सकते हैं।

नेशनल एंटी-करप्शन हेल्पलाइन (टोल फ्री): 1064 
(यह नंबर लगभग हर राज्य के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) में कार्य करता है)।

मध्य प्रदेश (MP) लोकायुक्त : 9407293446 (मोबाइल), 0755-2540889 (लैंडलाइन)।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) 181

ई-गवर्नेंस/लोक सेवा प्रबंधन (Toll-Free) 1800-2330-183। 

महत्वपूर्ण जानकारी:- यदि कोई रिश्वत मांगे तो इन नंबरों पर सीधे जानकारी दी जा सकती है। शिकायत सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे में कभी भी दर्ज कराई जा सकती है। 
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