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हटाएं जाएंगे जस्टिस यशवंत वर्मा ? जांच पैनल ने पाया नकदी का नहीं था हिसाब

हटाएं जाएंगे जस्टिस यशवंत वर्मा ?  जांच पैनल ने पाया नकदी का नहीं था हिसाब
देश
19-Jun-25
नई दिल्ली, डिजीटल डेस्क

14 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट जज के सरकारी बंगले में  आग लग गई थी तब आग बुझाने दमकलकर्मी वहां पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने वहां 500-500 के नोटों से भरी बोरियां मिली थी। इसके बाद जस्टिस यशवंत वर्मा संदेह के घेरे में आ गए थे । ये मामला पूरे देश की मीडिया में चर्चा का विषय बन गया था साथ ही न्यायपालिका की छवि को भी इस कांड से भारी नुकसान हुआ था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेआई ने 22 मार्च को लेटर जारी करते हुए एक जांच पैनल की घोषणा की थी।  इस जांच पैनल की रिपोर्ट 19 जून गुरूवार को सामने आई है। इसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट जज यशवंत वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का स्टोर रूम पर पूरा नियंत्रण था।  परिवार की अनुमति के बिना कोई भी स्टोर रूम में नहीं जा सकता था।10 चश्मदीदों ने आधी जली हुई नकदी देखी इनमें दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस के अधिकारी भी शामिल थे। इन सभी ने जस्टिस वर्मा के घर के स्टोर रूम में जले हुए नोटो के ढेर देखे थे। स्टोर रूम में लगे कैमरे से भी वही बात निकल कर सामने आई जो चश्मदीद गवाहों ने कही।  जस्टिस वर्मा के दो घरेलू कर्मचारियों हनुमान पार्षद शर्मा औरराजिंदर कार्की ने स्टोर रूम से जले हुए नोट निकाले थे। वायरल वीडियो से दोनों की आवाज मैच हुई है। मामले में जस्टिस वर्मा ने इसे षड्यंत्र कहा लेकिन पुलिस में इसकी कोई रिपोर्ट नहीं की। नकदी का कोई हिसाब न देने के कारण भी जस्टिस वर्मा पर शक गहरा गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाले तीन जजों के पैनल ने 10 दिनों तक जांच की। 55 गवाहों से पूछताछ की और जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास  का दौरा किया था। रिर्पोट में यह भी कहा गया है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों को ध्यान में रखते हुए समिति इस बात पर सहमत है कि सीजेआई के 22 मार्च के पत्र में लगाए गए आरोपों में पर्याप्त तथ्य है। आरोप इतने गंभीर है कि जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए कार्यवाही शुरू करनी चाहिए।
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