खरमास में क्यों थम जाते हैं विवाह ?
धर्म
11-Dec-25
खरमास क्यों लगता है और इसका महत्व क्या है ?
छिंदवाड़ा
इस वर्ष खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 मंगलवार को सुबह 4.26 बजे से होगी और 14 जनवरी 2026 को यह खत्म होगा। अक्सर हम सुनते हैं कि खरमास चल रहा है और इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते। लेकिन आखिर इसके पीछे का कारण क्या है? खरमास के लगने के मुख्य रूप से दो कारण माने जाते हैं
ज्योतिषीय कारण ( सूर्य और गुरु का संबंध ) - जब ग्रहों के राजा सूर्यदेव, देवगुरु बृहस्पति की राशियों (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है। गुरु विवाह और मंगल कार्यों के कारक हैं। सूर्य के तेज के सामने गुरु का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे शुभ कार्यों के फल पूर्ण रूप से नहीं मिल पाते।
पौराणिक कथा ( खर यानी गधा ) - एक प्रचलित कथा के अनुसार, सूर्यदेव अपने थके हुए घोड़ों को आराम देने के लिए रुके थे और कुछ समय के लिए अपने रथ में खर ( गधों ) को जोता था। गधों की गति धीमी होने के कारण सूर्य का तेज मद्धम पड़ गया था। इस धीमी गति के समय को ही खरमास कहा गया।

खरमास का महत्व
यह समय भले ही बाहरी मांगलिक कार्यों ( विवाह, मुंडन, व्यापार, गृह प्रवेश आदि ) के लिए उत्तम न हो, लेकिन यह आध्यात्मिक कार्यों, पूजा-पाठ, दान और ईश्वर भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होता है। इसे मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में भी देखा जाता है।
खरमास क्यों थम जाते हैं वैवाहिक कार्यक्रम ?
हम सभी जानते हैं कि खरमास में विवाह आदि मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। पर ऐसा क्यों? सरल शब्दों में कहे तो जब सूर्यदेव, देवगुरु बृहस्पति के घर (धनु या मीन राशि) में मेहमान बनकर जाते हैं, तब खरमास लगता है। सूर्य के तेज के कारण गुरु का प्रभाव धीमा पड़ जाता है, इसलिए शुभ कार्यों के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता। एक रोचक कथा यह भी है कि इस दौरान सूर्य का रथ घोड़ों की जगह खर ( गधे ) खींचते हैं, जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है। इस अवधि में मांगलिक कार्य भले ही रुक जाते हों, लेकिन यह समय दान-पुण्य और भक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।