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ये कैसी संवेदनहीनता ! न सांसद दिखे, न विधायक ?

ये कैसी संवेदनहीनता ! न सांसद दिखे, न विधायक ?
छिंदवाड़ा
28-Mar-26
समीक्षक - राम कुमार विश्वकर्मा

जनता के मन में यह प्रश्न उठना स्वभाविक है कि जिले में इतनी बड़ी सड़क दुर्घटना हो गई जिसमें लगभग 40 लोग घायल हो गए और 11 नागरिकों की मृत्यु हो गई लेकिन न सांसद बंटी विवेक साहू उपस्थित हुए और न विधायक कमलनाथ। जिस जनता ने वोट देकर इन्हें जनप्रतिनिधि बनाया उसी जनता के प्रति ये कैसी संवेदनहीनता ? ये कैसी उदासीनता? आखिर कौन सा कार्य था जो अपने ही नागरिकों के जीवन मूल्यों से बड़ा हो गया? कौन सी मजबूरी थी जो अपने नागरिकों के दुख की घड़ी में ये जनप्रतिनिधि साथ में खड़े दिखाई नहीं दिए।

माना की प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन सिंह ने इस घटना के बाद अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। वे आए और घायलों के साथ-साथ मृतकों के परिजनों से उनके घर जाकर मिले और उन्हें ढांढस बंधाया। उनके दुखदर्द को साझा किया। उनके लिए सहायता राशि की घोषणा भी की। शनिवार को नेता प्रतिपक्ष भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने छिंदवाड़ा आए और घायलों व मृतकों के परिजनों से मिले और अपनी सांत्वना और हर संभव सहयोग का आश्वासन देकर वापस चले गए।

माना कि घटना वाले दिन पूरा जिला प्रशासन, भाजपा-कांग्रेस के नेतागण अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए तुरंत ही जिला अस्पताल पहुंचे जिसके कारण दुर्घटना के घायलों को सही समय पर सही उपचार मिल गया नहीं तो ऐसा भी देखने में आया है कि जिला अस्पताल में डॉक्टरर्स भी उपलब्ध नहीं होते हैं जिससे मरीजों की जान चली जाती है। मीडिया में हंगामा होता है तब जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है और लापरवाह डॉक्टर पुनः आराम से अपनी नौकरी पर पूर्व की तरह ही लग जाते है। 

अब भी जनता के मन में प्रश्न यक्ष है? वो आपसी संवाद में प्रश्न पूछ रही है कि सांसद बंटी विवेक साहू और विधायक कमलनाथ अब तक क्यों नहीं पहुंचे? सूत्रों से पता चला है कि सांसद बंटी विवेक साहू असम चुनाव में व्यस्त हैं तथा विधायक कमलनाथ अपने स्वास्थ्य के चलते आने में असमर्थ है। हालांकि दोनों जनप्रतिनिधि दुर्घटना के घायलों और मृतकों के परिजनों से मिलने जरूर जाएंगे लेकिन अपनी सुविधा अनुसार। क्या ये जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि का अपने ही नागरिकों के प्रति असंवेदनशीलता और लापरवाही रवैया प्रकट नहीं करता। ये हम नहीं कह रहे ये कह रहा समय, ये कह रही है जिले की जागरूक जनता। प्रश्न दोनों प्रमुख पार्टियों के साथ-साथ जिले के दोनों प्रमुख नेताओं की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। देखना है इसकी भरपाई वे कैसे करते हैं और जनता इसे कब तक याद रखती है या फिर हमेशा की तरफ उसे भूलने की आदत है वैसे ही इस घटना को भी भूल जाएगी।
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