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हजारों लोगों के घरों में नहीं जल रहे चूल्हे, जनप्रतिनिधि और प्रशासन का नहीं ध्यान

हजारों लोगों के घरों में नहीं जल रहे चूल्हे, जनप्रतिनिधि और प्रशासन का नहीं ध्यान
छिंदवाड़ा
27-May-26
प्रशासन बैठकों और जनप्रतिनिधि सार्वजनिक कार्यक्रमों में व्यस्त, आम जनता त्रस्त

छिंदवाड़ा

गैस सिलेंडर की कमी से जूझ रही आम जनता की ओर न तो प्रशासन का ध्यान है और न ही जनप्रतिनिधियों का। मामला भारत गैस की अधिकृत एजेंसी प्रीति इंटरप्राईजेस से जुड़ा हुआ है। प्रीति इंटरप्राइजेस गैस एजेंसी से जुड़े उपभोक्ता तपती दुपहरी में गैस सिलेंडर के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। फिर चाहे भारत गैस के बड़े अधिकारी हो, एजेंसी हो या खाद्य विभाग का ऑफिस। सभी जगह आम उपभोक्ताओं के हाथ निराशा लग रही है। कहीं ऐसा न हो किसी भी दिन गैस सिलेंडर न मिलने से गुस्साई भीड़ गैस एजेंसी के ऑफिस, जनप्रतिनिधियों अथवा प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय में धरना देने पहुंच जाए।

66 साल की महिला कैसे जाए सिलेंडर लेने

शिकायतें तो बहुत है लेकिन ताजा मामला चंदनगांव निवासी श्रीमती अंजली पंडित का है। 66 वर्षीय यह विधवा महिला अपने बेटे के साथ रहती है। बेटा अविनाश पंडित फोटो कॉपी की दुकान में काम करता है। मां को कमरदर्द की समस्या है जिससे उन्हें चलने फिरने में तकलीफ होती है। सारे काम बेटे को ही करना पड़ता है। अविनाश पंडित ने बताया कि वे दो बार बुकिंग कर चुके हैं लेकिन सिलेंडर उन्हें नहीं मिला। गैस एजेंसी जाओ तो कहते हैं घर आ जाएगा लेकिन 20-25 दिन बीत जाने के बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा हैं। घर में सिलेंडर खत्म हो गया है तो मोहल्ले वालों की मदद से भोजन बन पा रहा है। ऐसे कई पीड़ित परिवार हैं जो गैस एजेंसी और कलेक्टर ऑफिस के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

प्रशासनिक अधिकारी बैठकों में व्यस्त

एक और उपभोक्ता सुनील मर्सकोले ने बताया कि कलेक्ट्रेट जाओ तो अधिकारी सीट पर नहीं मिलते और विभागीय कर्मचारी कहते हैं बैठक में गए हैं कल आना कहकर टाल देते हैं। अधिकारियों की बैठकों में व्यस्तता के कारण आम नागरिक परेशान हो रहे हैं। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है जिससे लोगों के अंदर गुस्सा पनप रहा है। प्रीति इंटरप्राइजेस की कारगुजारी के चलते कभी भी कलेक्ट्रेट ऑफिस में धरने के रूप में फूट सकता है।

जनप्रतिनिधियों को कोई मतलब नहीं

एक अन्य उपभोक्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वो पिछले डेढ़ महिने से गैंस एजेंसी के चक्कर काट रहा है लेकिन उसे सिलेंडर नहीं मिला है। गोदाम जाओ तो सिलेंडर की होम डिलेवरी के लिए कहा जा रहा है लेकिन होम डिलेवरी भी नहीं दी जा रही है। कई लोगों की बुकिंग ऑटोमेटिक कैंसिल बताई जा रही है। 

ओटीपी पर हो रहा बहुत बड़ा खेल

प्रीति इंटरप्राईजेस पर प्रशासनिक कार्यवाही नहीं होने से उसके हौंसले बुलंदी पर है। आम उपभोक्ताओं को गैस डिलेवरी के मैसेज आ रहे हैं लेकिन उन्हें सिलेंडर नहीं दिए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग यह कहते भी नजर आ रहे हैं हमारे सिलेंडर ब्लैक में 2500 हजार रूपए में बेचे जा रहे हैं। 
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