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मात्र 15 दिनों में 41 से अधिक गायों ने तोड़ा दम

मात्र 15 दिनों में 41 से अधिक गायों ने तोड़ा दम
राजनीति
15-Jul-26
कांग्रेस पार्षद दल ने पाठाढ़ाना की गोशाला पहुंचकर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

छिन्दवाड़ा

जिला मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी पर मौजूद पाठाढ़ाना की गौशाला में गौमाता अव्यवस्थाओं का शिकार हो रही है। गाय के लिए शुद्ध पेयजल, घास और चूनी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं है। साफ-सफाई का पूर्णतः अभाव और गंदगी के बीच बैठी गौमाताओं की दुर्दशा देख कांग्रेस पार्षद दल ने भारी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल व्यवस्थाओं में सुधार लाने की मांग की। दरअसल विगत 15 दिनों से गौशाला में गायों की मौत का सिलसिला सतत रूप से जारी है, लेकिन जिम्मेदारों के कानों तक आवाज नहीं पहुंची। कांग्रेस पार्षद दल ने गौशाला पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और पर्याप्त इंतजाम के लिए सम्बंधित अधिकारियों से चर्चा की। 

कौन-कौन पहुंचे और क्या देखा

निगम अध्यक्ष धर्मेन्द्र सोनू मागो, नेता प्रतिपक्ष श्रीमती हंसा अम्बर दाढ़े, पार्षद श्रीमती मंजू बैस, पार्षद तरूण कराड़े, पार्षद ब्रजेश टिंकू राय, दिगम्बर ठाकरे, आरिफ ठाकुर, अभिषेक गुप्ता, शिवराज चौरे व राजेश चौधरी ने पाठाढ़ाना की गौशाला पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो सामने आया कि गायों के लिए पीने का साफ पानी नहीं है। पर्याप्त घास, चूनी व साफ-सफाई का अभाव नजर आया। 

लापरवाही की हद, मात्र 15 दिनों में 41 गौमाता ने तोड़ा दम

विगत एक जुलाई से आज दिनांक तक प्रदेश की इकलौती आदर्श गौशाला में ज्ञात 43 गौमाता लापरवाही के चलते जान गंवा चुकी है। इसमें अज्ञात कितनी है यह कहना मुश्किल है। मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के द्वारा इसे आदर्श गौशाला बनाया गया था और यहां 500 तक गाय आसानी से रखी जा सकती है, किन्तु दुभार्ग्य देखिए की भाजपा शासित नगर पालिक निगम 250 गायों की देखरेख में विफल साबित हो रही है। जिनकी नैतिक जिम्मेदारी है वे अपना राजनीतिक भविष्य बचाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। 

नाराज पार्षद दल ने कहा, नगर निगम तत्काल व्यवस्था सुधारे

कांग्रेस पार्षद दल ने अव्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल व्यवस्था बनाने एवं गायों के लिए पर्याप्त उपचार का इंतजाम किए जाने हेतु सम्बंधित अधिकारियों से चर्चा की साथ ही गौशाला में प्रत्येक गाय के लिए घास, दाना, चूनी व शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस गम्भीर लापरवाही की जिम्मेदारी लेने से भागने वालों का समय निर्धारित हो चुका है। जो जनता का नहीं, गौमाता का नहीं हो सकता वह किसी का नहीं हो सकता। जिस तरह गौमाताओं की जान तड़प तड़पकर गई है वह बेहद दुभार्ग्यजनक व निंदनीय है। चूंकि गौशाला नगर पालिक निगम छिन्दवाड़ा से संचालित होती है इसीलिये प्रथम जिम्मेदारी नगर पालिक निगम की है कि वह सुचारू व अच्छी व्यवस्थाओं का निर्मित करें ताकि गौमाता की मौत ना हो, लेकिन भाजपा शासति नगर पालिक निगम यहां भी पूरी तरह विफल साबित हुई है।


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