छह दिवसीय दीपोत्सव की 5 नवंबर से हुई शुरूआत
धर्म
05-Nov-26
दीपावली 8 नवंबर रविवार को
पूरा त्योहार 6 नवंबर से 11 नवंबर तक चलेगा

छिंदवाड़ा अपडेट
दीवाली के पर्व का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका समापन भाई दूज पर होता है। इस दौरान रोजाना शाम को दीपक जलाने का विशेष महत्व है।
यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस से लेकर भाई दूज तक दीपक क्यों जलाए जाते हैं और इसके पीछे की असली वजह क्या है? अगर नहीं, तो आइए विस्तार से इसके रहस्य के बारे में जानते हैं।
1. वसु बारस - गौ पूजन और बछड़ा पूजन
तारीख - 5 नवंबर 2026, गुरुवार
मुहूर्त - प्रदोष काल शाम 5.34 से 8.09
क्या और कैसे होता है - इस दिन गाय और बछड़े की पूजा होती है। गाय को हल्दी कुमकुम, फूल माला पहनाकर आरती करें, बाजरा और गुड़ खिलाएं। मालवा में इसी दिन गौ माता को घर बुलाया जाता है। बैल की पूजा नहीं, सिर्फ गौ पूजन।
विशेष: गाय माता और बैल को पूजकर उनसे समृद्ध खेती का आशीर्वाद लिया जाता है। इससे साल भर गाय माता और बैल की कृपा खेती-किसानी पर रहती है।
2. धनतेरस - धन त्रयोदशी
तारीख - 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
तिथि - सुबह 10.30 से अगले दिन 10.47 तक
पूजन मुहूर्त - शाम 6.02 से 7.57 तक
क्या करना चाहिए - भगवान धन्वंतरि जयंती, कुबेर और लक्ष्मी पूजन। इस दिन सोना चांदी बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। शाम को यम के नाम का दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाएं - अकाल मृत्यु टलती है।
महत्व - दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन घर की दक्षिण दिशा में यम का दीपक जलाने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के नाम का दीपक जलाने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
3. रूप चौदस / नरक चतुर्दशी - काली चौदस / छोटी दिवाली
तारीख - 7 नवंबर शनिवार रात और 8 नवंबर रविवार सुबह
अभ्यंग स्नान मुहूर्त - सुबह 5.41 से 6.38 तक
काली पूजन निशीथ काल - रात 11.57 से 12.48
क्या करना चाहिए - सुबह उबटन से स्नान करना चाहिए जिससे रूप निखरता है इसलिए इसे रूप चौदस कहते हैं। शाम को 14 दीपक जलाएं, हनुमान जी की पूजा करें।
महत्व - पौराणिक कथा के अनुसार, छोटी दीवाली के अवसर पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और 16,100 राजकुमारियों व बंदियों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसलिए इस दिन भय और अंधकार पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में दीप जलाए जाते हैं।
4. दीपावली - लक्ष्मी पूजन - मुख्य दिन
तारीख - 8 नवंबर 2026, रविवार
अमावस्या - सुबह 11.27 से 9 नवंबर दोपहर 12.31 तक
लक्ष्मी पूजन महामुहूर्त - शाम 5.54 से 7.50 तक
प्रदोष काल - 5.31 से 8.09
वृषभ लग्न - 5.54 से 7.50 (इसी में पूजा श्रेष्ठ)
क्या करना चाहिए - गणेश लक्ष्मी, कुबेर, सरस्वती, बही खाता पूजन। 5 घी के दीपक लक्ष्मी जी के सामने।
महत्व - कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस आए थे। उनके आगमन की खुशी में नगरवासियों ने दीपक जलाकर प्रभु का स्वागत किया था। इसलिए दीवाली के दिन दीपक जलाना सबसे शुभ माना जाता है। दीयों की रोशनी अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर जीवन में ज्ञान, सुख और समृद्धि लाती है।
5. गोवर्धन पूजन - अन्नकूट - बैल पूजन
तारीख - 10 नवंबर 2026, मंगलवार
तिथि - 9 नवंबर दोपहर 12.31 से 10 नवंबर 2.00 तक
मुहूर्त - सुबह 6.40 से 8.50 और दोपहर 3.46 से 6.02
क्या करें - गोवर्धन पर्वत (गोबर से बनाकर) की पूजा, 56 भोग अन्नकूट, बैलों की पूजा इसी दिन होती है।
महत्व - दीपोत्सव के चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में ब्रज के लोग देवराज इंद्र की पूजा करते थे। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा कि हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जिससे हमारी गायों को चारा और हमें जीवन मिलता है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र का अहंकार तोड़ा था और गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसके बाद लोगों ने प्रभु को 56 भोग अर्पित किए और दीप जलाए। इसी वजह से गोवर्धन पूजा के दिन दीपक जलाने का विधान है।
6. भाई दूज - यम द्वितीया
तारीख - 11 नवंबर 2026, बुधवार
तिलक मुहूर्त - दोपहर 1.10 से 3.20 तक
क्या करना - बहन भाई के माथे पर तिलक, यम और यमुना की कथा। भाई को भोजन। चित्रगुप्त पूजन।
महत्व - यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उनका तिलक करती हैं और दीप जलाकर उनकी आरती उतारती हैं।