21 मवेशियों की मौत पर नगर निगम नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
राजनीति
10-Jul-26
केन्द्र से लेकर राज्य तक भाजपा की सरकार है फिर गौशाला बेहाल

छिन्दवाड़ा
घोषणाओं और भाषणों में गाय के लिए चिंतित रहने वाले 21 मवेशियों की मौत पर भी मौन है क्योंकि अभी चुनाव नहीं है, वोट भी नहीं मागना है, इसीलिये ना गाय से मतलब है ना ही गौशाला से। गंदगी और कीचड़ के बीच रह रही गौमाता सड़क से लेकर गौशाला तक असुरक्षित है। सुरक्षा देने का दावा करने वाली भाजपा सरकार व्यक्तिगत विकास में व्यस्त है। उक्त उदगार निगम में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती हंसा अम्बर दाढ़े ने नगर पालिक निगम के अधीन आने वाली पाठाढ़ाना की गौशाला में 21 मवेशियों की मौत पर व्यक्त किए।
कमलनाथ जी की विरासत भी नहीं संभाल पा रही भाजपा
श्रीमती दाढ़े ने जारी बयान में आगे कहा कि मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने प्रदेश में 1 हजार सुव्यवस्थित गौशालाएं बनवाई थीं, इसके पीछे उनका उद्देश्य था कि गौमाता सड़कों पर ना भटके, गौशाला में ही रहे। उनके लिए पर्याप्त दाना, चारा व पानी के भी इंतजाम कमलनाथ जी की 15 माह की सरकार में हुए थे। आज केन्द्र से लेकर राज्य तक भाजपा की सरकार है। स्थानीय निकाय नगर पालिक निगम जिसके अधीन पाठाढ़ाना की गौशाला आती है वहां भी बीजेपी की सरकार है। इसके बाद भी गौमाता सड़क या फिर गौशाला में तड़प तड़पकर दम तोड़ रही। भाजपा सरकार के गौमाता की सुरक्षा के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे।
बीमार गाय चारा-पानी और दवाईयों के लिए तरस रही
श्रीमती दाढ़े ने कहा पाठाढ़ाना स्थित गौशाला केवल कागजों में और नाम के लिए ही आदर्श है, सच्चाई यह है कि अब यहां कोई आदर्श कार्य नहीं हो रहे जिससे गौमाता की सुरक्षा व रक्षा की उम्मीद की जा सके। निष्क्रिय महापौर भाजपा में डूबते हुए अपने अस्तित्व को बचाने नेताओं की चौखटों और यात्राओं में व्यस्त है, और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी बेपरवाह है। परिणाम यह है कि गाय को गौमाता का दर्जा दिलाने का झूठा ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा आज गायों का समुचित उपचार, साफ सफाई भी नहीं करवा पा रही। चारा, चूनी और पानी के भी पुख्ता इंतजाम नहीं है। यह भाजपा के उस ढोल की पोल है जिसे दबाकर भाजपा चुनाव आते ही जोर-जोर से पीटकर झूठी वाहवाही लूटती है, लेकिन सच्चाई अधिक दिनों तक छिपाई नहीं जा सकती है इसीलिये देर सवेर ही सही लेकिन सामने तो आती ही है।
घटना के लिए भाजपा और प्रशासनिक अमला दोषी
जिला मुख्यालय से लगी गौशाला में 21 गायों की मौत सामान्य घटना या फिर एक दिन में घटित होने वाली नहीं है। साफ है मवेशी लम्बे समय से बीमार रहे हैं और उन्हें उचित उपचार नहीं मिला जिसके चलते दम तोड़ दिया। प्रश्न यह कि इतने दिनों तक जिम्मेदार कहां थे? उपचार क्यों नहीं कराया गया? गौमाता के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेकने वाले भाजपा नेता कहां थे? सवाल प्रशासनिक जिम्मेदारों से भी जिनकी उचित इलाज देने की जिम्मेदारी है आखिर वे कहां थे? इसका एक ही जवाब है कि भाजपा के नेता सत्ता की नींद में सो रहे थे और प्रशासनिक अमला इनके जागने का इंतजार कर रहा था, लेकिन तब तक मवेशियों की मौत हो चुकी थी। हो सकता है भाजपा इसमें भी अपनी जिम्मेदारी से भागते हुए कांग्रेस पर हास्यासपद ढंग से दोषारोण करें या फिर अपनी रीति-नीति को आगे बढ़ाते हुए बयानबाजी करें, लेकिन सच्चाई तो यही है कि भाजपा की सरकार में गाय सड़क पर भी और गौशाला में भी दम तोड़ रही।