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जिन्दा रहते इलाज के लिए और मौत के बाद पीएम के लिए भटकते परिजन: सुरेश कपाले

जिन्दा रहते इलाज के लिए और मौत के बाद पीएम के लिए भटकते परिजन: सुरेश कपाले
राजनीति
10-Jul-26
जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर भाजपा को घेरा

छिन्दवाड़ा

कभी मूलभूत सुविधाओं का अभाव तो कभी इलाज के लिए मोहताज जनता। जिन्दा रहते इलाज के लिए और मौत के बाद पीएम के लिए भटकते परिजन, यही है भाजपा सरकार की असली पहचान। जिला अस्पताल में जिन्दगी और मौत दोनों ही शर्मसार हुई। भाजपा के सुरक्षति मातृत्व अभियान में गर्भवती माताएं फर्श पर बैठकर जांच के लिए घंटों इंतजार करती रही तो वहीं दूसरी ओर एक पीएम के परिजन घंटों तक अस्पताल परिसर में भटकते रहे। उक्त उदगार जिला कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेश कपाले ने जिला अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं पर भाजपा सरकार को घेरते हुए व्यक्त किए।

जिला मुख्यालय में ये हाल तो ग्रामीण क्षेत्रों में क्या होंगे

श्री कपाले ने कहा कि कहने को जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध है, लेकिन व्यवस्थाएं दोयम दर्जे की, क्योंकि प्रथम दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएं विज्ञापनों में सिमटकर रह गई है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण छिन्दवाड़ा का जिला अस्पताल है, जहां कभी मशीन खराब तो कभी दवाइयां समाप्त। सुरक्षा व्यवस्था ताक पर और भ्रष्टाचार आसमान पर। दूरदराज से आने वाली मातृशक्ति को पहले तो घंटों कतार में खड़ा रखा गया फिर समय पर जांच नहीं हुई तो उन्हें मजबूरीवंश फर्श पर ही बैठकर अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ा। यह भाजपा सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्ची तस्वीर है। अब इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय पर स्वास्थ्य सेवाएं इस तरह चरमराई हुई है तो ग्रामीण अंचल के प्राथमिक व सामुदायिक केन्द्रों में नागरिकों को कितना समुचित उपचार मिल पाता होगा। राजनीतिक दिखावे के लिए स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करना और उन राजनीतिक आयोजनों में शासकीय कर्मचारियों की तत्परता देखने लायक होती है। झूठे आंकड़े प्रस्तुत कर अपने हाथों अपनी पीट थपथापने वाले सांसद को जिला अस्पताल की यह दुर्दशा नजर नहीं आ रही।

न कोई दर्द सुनने वाला नकोई समझने वाला

दिवंगत युवती के परिजन अस्पताल परिसर के भीतर लगातार घंटों भटकते रहे, ताकि समय पर पीएम हो जाए और उन्हें शव मिल पाए। दुख का पहाड़ टूटा हुआ था, लेकिन उनके दर्द और निवेदन को सुनने व समझने वाला कोई नहीं था। सरकार की आम नागरिकों के प्रति संवेदनाएं समाप्त हो चुकी है, इसीलिये आम जनता की परेशानियों और दुख-दर्द से भाजपा का वास्ता नहीं रहा। सरकार सभी मोर्चों पर पूरी तरह विफल हो चुकी, जिसे जनता भी देख चुकी और समझ चुकी है। बड़ी-बड़ी बातें और बड़े-बड़े दावे सब खोखले साबित हो रहे। अंततः जनता त्रस्त और परेशान है, क्योंकि जिन्दा रहते इलाज और मौत के बाद पीएम के लिए भी भटकना पड़े ऐसी सरकार पर धिक्कार है।
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