धर्म और देशभक्ति का संगम बनेगी विशाल गदा एवं पदयात्रा
छिंदवाड़ा
25-Mar-26
देश के सैनिकों की सलामती और दीर्घायु के लिए जामसांवली तक पदयात्रा
छिंदवाड़ा
हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर रूद्रात्मक हनुमान समाज कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित “विशाल गदा एवं पद यात्रा” इस वर्ष भी भक्ति, उत्साह और राष्ट्र समर्पण की अद्भुत भावना के साथ प्रारंभ होने जा रही है। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान, आभार और उनकी दीर्घायु की कामना का सशक्त माध्यम बन चुकी है। यात्रा संयोजक एवं समिति के सचिव अखिल सूर्यवंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक पदयात्रा पिछले 25 वर्षों से निरंतर हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर निकाली जा रही है।

कार्यक्रम की शुरुआत 30 मार्च को हनुमान जी के चोला (बागा) की भव्य महाआरती से होगी। इसके पश्चात 31 मार्च को दोपहर 3 बजे संकट मोचन हनुमान मंदिर, नरसिंहपुर नाका से विशाल पदयात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। पदयात्रा के सफल संचालन हेतु यात्रा प्रभारी जितेंद्र काकोरिया, कमलेश सोनिकर एवं पप्पू साहू को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो संपूर्ण व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करेंगे।
अध्यक्ष गोलू वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस संपूर्ण आयोजन की विस्तृत रूपरेखा समाज हित और राष्ट्र समर्पण की भावना को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें सहभागिता निभा सकें। उपाध्यक्ष कमलेश वर्मा ने भी कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह पदयात्रा भक्ति, अनुशासन और सेवा का संगम होगी, जिसमें सभी वर्गों के लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। कोषाध्यक्ष संदीप यादव ने शहर की समस्त जनता से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक इस पावन यात्रा में कम से कम पांच कदम अवश्य चले, ताकि हमारे वीर जवानों के प्रति सम्मान और एकजुटता का संदेश पूरे समाज में प्रसारित हो सके।
01 अप्रैल को बंजारी पत्ता गोदम में पद यात्री के लिय विशाल भंडारे का आयोजन किया संजू यादव करेंगे। वहीं 02 अप्रैल को चमत्कारी श्री हनुमान मंदिर, जामसावली में गदा समर्पण एवं महाआरती के साथ यात्रा का समापन होगा। इसके उपरांत 03 अप्रैल को बसंत कॉलोनी में विशाल भंडारे एवं देवी जागरण का आयोजन किया जाएगा, जिसमें समस्त श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया गया है। यह पदयात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के वीर रक्षकों के प्रति समर्पण, सम्मान और आस्था का जीवंत प्रतीक है।