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निगम ने 6 कॉलोनियां अवैध घोषित की लेकिन कॉलोनाईजरों पर कार्रवाई नहीं

निगम ने 6 कॉलोनियां अवैध घोषित की लेकिन कॉलोनाईजरों पर कार्रवाई नहीं
छिंदवाड़ा
30-Apr-26
निगम की जांच में पाई गई थी अवैध प्लाटिंग, नोटिस का नहीं दिया जवाब

छिन्दवाडा

शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ नगरीय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम आयुक्त सी.पी. राय ने आदेश जारी कर बिना वैधानिक अनुमति विकसित की जा रही 6 कॉलोनियों को अवैध घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई लगातार मिल रही शिकायतों और विस्तृत जांच के बाद की गई है। राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा की गई जांच में सामने आया कि संबंधित भू-स्वामियों ने बिना किसी अनुमति के कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर उनका विक्रय किया। मौके पर जांच, पटवारी रिपोर्ट और पंचनामा में भी अनियमितताओं की पुष्टि हुई।

निगम के अनुसार ये है अवैध कॉलोनाइजर

कार्रवाई की जद में आए भू-स्वामियों में श्री अरविन्द (पिता हरिराम) खसरा नंबर 108, रकबा 0.1280 हेक्टेयर, श्री संतोष (पिता रब्बा) खसरा नंबर 109, रकबा 0.0700 हेक्टेयर, श्री राजेश परानी (पिता सूरज परानी) खसरा नंबर 109, रकबा 0.0180 हेक्टेयर, श्री रतनु (पिता मखना) खसरा नंबर 128, रकबा 0.1890 हेक्टेयर, श्री महेन्त कुमार उइके (पिता प्रेमचंद उइके) खसरा नंबर 128, रकबा 0.6040 हेक्टेयर तथा श्रीमती शांति (पति राम धुर्वे) खसरा नंबर 68, रकबा 0.4050 हेक्टेयर शामिल हैं।

जांच पूरी लेकिन एफआईआर नहीं की

जांच प्रतिवेदन के अनुसार इन कॉलोनाइजरों ने न तो भूमि का डायवर्जन कराया, न ही रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में पंजीकरण कराया और न ही कॉलोनी विकास के लिए अनिवार्य कॉलोनाइजर लाइसेंस प्राप्त किया। प्रशासन ने इसे मध्यप्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी विकास नियम 2021) का गंभीर उल्लंघन माना है। नगर निगम द्वारा संबंधित पक्षों को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, किंतु उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद अंतिम नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी भी दी गई थी। निर्धारित समय-सीमा में जवाब नहीं मिलने पर नियम 2021 की कंडिका 22(4) के तहत संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

क्या कहती है नगर निगम

नगर निगम आयुक्त ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कॉलोनी में निवेश करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति, रेरा पंजीकरण और आवश्यक अनुमतियों की जांच अवश्य करें। उन्होंने बताया कि अवैध कॉलोनियों में निवेश करने पर भविष्य में गंभीर कानूनी जटिलताओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
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