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भरत मिलाप और पंचवटी की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रोता

भरत मिलाप और पंचवटी की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रोता
छिंदवाड़ा
31-Mar-26
अनगढ़ हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती तक प्रतिदिन रामायण श्रवण कर रहे श्रद्धालु 
 
छिंदवाड़ा

स्थानीय अनगढ़ हनुमान मंदिर में आयोजित श्री राम कथा के पांचवे दिन महामंडलेश्वर नागेन्द्र ब्रह्मचारी ने व्यासपीठ से भरत मिलाप की कथा सुनाई। भगवान राम के अनुज भरत बड़े भैया राम के वियोग में तड़प रहे हैं। कैसे बड़े भैया राम से मिल लें उनका रो रोकर बुरा हाल है। गंगा पार कर चित्रकूट में निषादराज के साथ कष्टों को सहते-सहते जा रहे हैं। साथ में तीनों माताएं, राजा जनक, महामंत्री सुमंत अयोध्या के नर नारी के साथ पैदल चले जा रहे हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी किनारे अत्री मुनि, अनसुईया के आश्रम के पास घास की कुटिया बनाकर माता जानकी संग मर्यादा पुरुषोत्तम राम, अनुज लक्ष्मण संग रह रहे हैं।

श्री नागेन्द्र जी ने आगे कहा कि भरत जी का अपार प्रेम राम जी से है जब वे बड़े भैया राम को देखते हैं तो दंडवत प्रणाम करते हैं। भगवान राम उन्हें गले लगाते हैं। भरत वनवासी राम से वापस अयोध्या जाने की जिद करते हैं। राम जी उन्हें समझाते हैं अंत में भरत थकहार कर भगवान राम की खड़ाऊ अपने सिर पर रख वापस अयोध्या जाने के लिए तैयारी करते हैं। जाते-जाते वे भगवान राम जी से कहते हैं भैया 14 वर्ष से एक दिन भी ज्यादा हुआ तो अपने भरत को नहीं पाओगे। हमेशा आप ही अयोध्या के राजा रहेंगे। भगवान राम वहां से आगे बढ़ते हैं और पंचवटी में अपनी कुटिया बनाकर रहते हैं। इसी बीच रावण की बहन शूर्पनशा भगवान राम और लक्ष्मण पर मोहित होती है और विवाह का प्रस्ताव रखती है जिससे क्रोधित होकर लक्ष्मीण जी शूर्पनशा की नाक काट देते हैं। शूर्पनखा रावण के दरबार पहुंचती है जहां रावण खर और दूषण को भेजते हैं जिनका भी वध राम और लक्ष्मण करते हैं। इससे क्रोधित रावण माता सीता का हरण कर लंका ले जाता है। 

ध्यान रहे सुबह 9 बजे से पूज्य ब्रह्मचारी जी एवं विद्वानों की उपस्थिति में हनुमान चालीसा,सुंदर कांड,हनुमान अष्टक,बजरंग बाण की चौपाइयां का गायन कर हवन किया जा रहा है। कथा में बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी बंधुओं माताओं बहनों की उपस्थिति प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
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