शिक्षकों को बताया विज्ञान पढ़ाने का सरल तरीका
शिक्षा
11-Jun-26
विज्ञान विषय की त्रिदिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न
छिन्दवाडा
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश एवं समग्र शिक्षा अभियान के तत्वावधान में कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार तथा विज्ञान विषय के प्रायोगिक शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 08 जून से 10 जून 2026 तक विज्ञान प्रायोगिक प्रशिक्षण का आयोजन शासकीय पी.एम.श्री कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कैलाश नगर छिंदवाड़ा में किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डाइट छिंदवाड़ा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के सफल संचालन में डाइट प्राचार्य श्री पांडवा सर का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण हेतु श्रीमती मनीषा मिश्रा ने नोडल अधिकारी तथा श्रीमती वंदिता दुबे ने सहायक नोडल अधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशिक्षण के प्रारंभिक सत्र में प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. रहीस खान ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विज्ञान शिक्षा में प्रयोगात्मक गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं श्री हर्षित चाँद द्वारा प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों को प्रशिक्षण के उद्देश्यों, अपेक्षित अधिगम परिणामों तथा कक्षा शिक्षण में प्रयोगात्मक विधियों के प्रभावी उपयोग के संबंध में विस्तार से अवगत कराया गया।
कार्यशाला में विज्ञान विषय के विभिन्न प्रायोगिक पहलुओं, प्रयोगशाला गतिविधियों, नवाचार आधारित शिक्षण विधियों, विज्ञान मॉडल एवं प्रयोगों के प्रभावी प्रदर्शन तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने संबंधी विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी शिक्षकों को प्रयोगशाला उपकरणों के उपयोग, प्रायोगिक मूल्यांकन तथा गतिविधि आधारित शिक्षण की नवीन तकनीकों से परिचित कराया गया।
प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर श्री राकेश डेहरिया, श्री अभिनव श्रीवास्तव एवं श्री विवेक कराड़े द्वारा विभिन्न सत्रों का संचालन किया गया। मास्टर ट्रेनर्स ने विज्ञान विषय को रोचक, गतिविधि-आधारित एवं प्रयोगात्मक तरीके से पढ़ाने के उपायों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की तथा प्रतिभागी शिक्षकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे विद्यालय स्तर पर विज्ञान शिक्षण को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकेगा तथा विद्यार्थियों की प्रायोगिक समझ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सीखने के परिणामों में सकारात्मक सुधार होगा। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने प्राप्त प्रशिक्षण का उपयोग विद्यालयों में प्रभावी रूप से करते हुए विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार तथा प्रयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।