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गुरू को तिलक लगाकर लिया आशीर्वाद, शाल श्रीफल से किया सम्मान

गुरू को तिलक लगाकर लिया आशीर्वाद, शाल श्रीफल से किया सम्मान
छिंदवाड़ा
10-Jul-25
जिले भर में उत्साह और श्रद्धा से मनाई गई गुरू पूर्णिमा

छिंदवाड़ा

महर्षि वेद व्यास के जन्मदिवस को आदिकाल से गुरू पूर्णिमा के रूप में मनाने की परंपरा आज भी उसी श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। 10 जुलाई को गुरूपूर्णिमा के अवसर पर शहर के शैक्षणिक संस्थानों से लेकर मठ-मंदिरों में गुरू को तिलक लगाकर और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया गया। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया गया जो देर रात तक चला। इसके अलावा भजन कीर्तन से दिनभर मंदिर गुंजाए मान रहे।

चंदनगांव में शिक्षकों का शाल श्रीफल से सम्मान

चंदन नगर के वार्ड क्रमांक 36 के पार्षद दिवाकर सदारंग के द्वारा क्षेत्र के सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं गुरुजनों का का तिलक पुष्पमाला एवंशाल श्रीफल, सम्मान किया गया। जिन शिक्षकों का सम्मान किया गया उनमें राजेंद्र बावसे महाराज , गजेंद्र बारस्कर, बलराज ईवनाती, मोहन गोहटे, कैलाश चंद पाल शामिल थे। इस अवसर पर  राजेंद्र अलडक, कमलेश अन्नू शिवारे, रोशन सिंगनापुरे, बृजेश बर्मन , शानू वर्मा, भावेश डोबले, श्रीहरि वाडबुदे, यशवंत वानखड़े, मधुकर मंगले, राजकुमार बैरागी, शिवराव सिंगनापुरे, ब्रज सिंह रघुवंशी विनायक ढोक, जनार्दन लंगोटे, विशाल विश्वकर्मा, पूजा सहित भाजपा नेता व कार्यकर्ता उपस्थित थे।

                                                                                               

इसी तरह वार्ड क्रमांक 34 दुर्गा माता मंदिर वार्ड में भी गुरुजनों का सम्मान किया गया जिनमें शेषराव अल्डक, पंचम पवार, जीडी लिंगायत, माणिक राव इंगले, अवस्थी सर, निरपतजी टेखरे, संजय शर्मा, बिंदेश्वर घटकड़े,  रमेश बाल पांडे  के अलावा दुर्गा मंदिर के पुजारी  राजेंद्र महाराज का भी शाल श्रीफल देकर सम्मान किया गया । सम्मान कार्यक्रम पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष जागेंद्र अल्डक, मंडल अध्यक्ष नवीन बारस्कर, पंकज पाटनी, शरद बेन्डे, मोहित बुनकर, दिवाकर ठाकरे सहित वार्ड वासी उपस्थित रहे।

शासकीय कन्या शिक्षा परिसर में पुस्तक व गणवेश वितरित किया गया

शासकीय कन्या शिक्षा परिसर  में गुरू पूर्णिमा के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर विक्रम अहके ने की तो वहीं मुख्य अतिथि प्रभारी एडीएम श्रीमती अंकिता त्रिपाठी तथा विशेष अतिथि के रूप में भारत घई एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य कन्या शिक्षा परिसर छिन्दवाड़ा श्रीमती अल्पना बी.कुमार उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती पूजन एवं गुरूवंदना से किया गया। इसके बाद अतिथियों द्वारा छात्राओं को पुस्तक वितरण एवं गणवेश वितरण किया गया। शाला के समस्त शैक्षणिक स्टॉफ का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के अन्त में प्राचार्य बसंत कुमार सनोडिया ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

पीजी काॅलेज में मनी गुरू पूर्णिमा

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस पी.जी. कॉलेज  में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालयीन कार्यक्रम की शुरुआत जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष भारत घई ने दीप प्रज्वलन से की। इस अवसर पर सदस्य कृपा शंकर सूर्यवंशी, तरुण सोनी, अनिता बरमैया, समीर दुबे, प्रभारी प्राचार्य डॉ.उर्मिला खरपुसे एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ.पी.एन. सनेसर उपस्थित थे।कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन डॉ. टीकमणी पटवारी ने किया तथा डॉ.पी.एन. सनेसर ने अतिथियों एवं गुरुओं के स्वागत उद्बोधन में कहा कि यह दिन केवल एक आयोजन नहीं बल्कि उस अनमोल और प्राचीन भारतीय परंपरा का प्रतीक है, जहां ज्ञान, संस्कार और चरित्र का दीप, एक गुरु अपने शिष्य के मन मस्तिष्क और जीवन में प्रज्वलित करता है। कार्यक्रम में डॉ.लक्ष्मीचंद, डॉ.विनोद माहूरपावर, डॉ.सुशील पटवा, प्रो.महेंद्र साहू, डॉ.सुनामिका उईके सहित समस्त स्टॉफ एवं चंचलेश साहू, भूमिका धुर्वे, संकल्प विश्वकर्मा, अमित बारई एवं योगेश सहित अन्य विद्यार्थी उपस्थित थे।

धार्मिक आयोजनों के बहाने बढ़ा सामाजिक संवाद
रामेश्वरम धाम सहित अन्य मंदिरों में भक्ति के साथ-साथ श्रद्धालुओं के बीच आपसी मेलजोल, सहयोग और सांस्कृतिक संवाद का वातावरण बना। आयोजनों में बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की सहभागिता ने यह साबित किया कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक सामाजिक पुनर्संवाद का अवसर है।

पीढ़ियों को जोड़ता पर्व बना गुरु पूर्णिमा

शहर के विभिन्न विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में जहां विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शिक्षकों के प्रति आभार जताया, वहीं बुजुर्गों और परंपरागत गुरुओं को आमंत्रित कर पीढ़ियों के बीच संवाद की कोशिश भी देखने को मिली।

आध्यात्म से आगे बढ़ा संदेश: गुरु का हर रूप पूज्य

इस बार गुरु पूर्णिमा ने यह सिद्ध कर दिया कि गुरु केवल मठों और मंदिरों में नहीं होते — वे घर में माता-पिता, समाज में शिक्षक, और मार्गदर्शन देने वाले हर व्यक्ति के रूप में हमारे साथ होते हैं।

इस तरह छिंदवाड़ा में गुरु पूर्णिमा केवल पूजा का नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, सिखाने और संवारने का पर्व बनकर उभरी।
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