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न्यूटन के सरकरी छात्रावास में अधीक्षिका के खिलाफ लगाए नारे

न्यूटन के सरकरी छात्रावास में अधीक्षिका के खिलाफ लगाए नारे
छिंदवाड़ा
10-Aug-26
निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन नहीं मिलने का आरोप; जांच और व्यवस्था सुधार की मांग

छिंदवाड़ा

न्यूटन चिकली स्थित जूनियर आदिवासी कन्या छात्रावास में उस समय स्थिति गरमा गई, जब छात्राओं ने छात्रावास में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्राओं ने छात्रावास की अधीक्षिका माया के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखने की मांग की। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें निर्धारित मीनू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

मीनू के अनुसार भोजन नहीं मिलने का आरोप

प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने बताया कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से परेशानी बनी हुई है। उनका आरोप है कि निर्धारित खाद्य सामग्री के स्थान पर कम गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। छात्राओं के मुताबिक कई बार समस्या बताने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में रहने वाली बालिकाओं के लिए भोजन केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, पढ़ाई और दैनिक जीवन से सीधे जुड़ा विषय है। पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायतों की जांच से सामने आएगी हकीकत

मामले के सामने आने के बाद छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग उठ रही है। जांच में यह देखा जाना जरूरी है कि छात्रावास में निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन तैयार किया जा रहा था या नहीं। साथ ही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, उपलब्ध स्टॉक, स्टॉक रजिस्टर और भोजन व्यवस्था से संबंधित अभिलेखों की भी जांच की जा सकती है।

छात्राओं से सीधे बात करे प्रशासन

छात्रावास में रहने वाली आदिवासी बालिकाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में शिकायत सामने आने के बाद अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर छात्राओं से सीधे बातचीत करने और उनकी समस्याएं सुनने की आवश्यकता है। इसके साथ ही भोजन की गुणवत्ता की जांच, खाद्य सामग्री के स्टॉक का भौतिक सत्यापन और निर्धारित मीनू के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल जरूरी है। यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

‘विवाद नहीं, व्यवस्था में सुधार चाहिए’

प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं है। वे चाहती हैं कि छात्रावास में उन्हें बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले। छात्राओं ने मांग की कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और भोजन व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। अब मामला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद आगामी कार्रवाई पर नजर है। छात्राओं के आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा, लेकिन छात्रावास में रहने वाली बालिकाओं की भोजन व्यवस्था को लेकर सामने आई शिकायत ने सरकारी छात्रावासों की व्यवस्थाओं की निगरानी पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
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