देवी पार्वती की तपस्या एवं शिव-शक्ति विवाह प्रसंग से गूंजा शिव आराधन महोत्सव
छिंदवाड़ा
28-Mar-26
छिंदवाड़ा
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित शिव आराधन महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर “देवी पार्वती की तपस्या एवं शिव-शक्ति विवाह” विषय पर भावपूर्ण कथा का आयोजन किया गया। प्रवचन में बताया गया कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की और अटूट श्रद्धा, विश्वास एवं समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

प्रवक्ता साध्वी जी ने कहा कि माता पार्वती की तपस्या हमें यह सिखाती है कि जब लक्ष्य पवित्र हो और संकल्प दृढ़ हो, तो कठिन से कठिन मार्ग भी सरल हो जाता है। माता पार्वती ने वर्षों तक तप कर अपने मन, वचन और कर्म को शिवमय बना लिया। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया और शिव-शक्ति का दिव्य मिलन हुआ।
प्रवचन में आगे बताया गया कि शिव और शक्ति का विवाह केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है। शिव चेतना हैं और शक्ति ऊर्जा कृ दोनों के मिलन से ही सृष्टि का संचालन संभव है। यह प्रसंग हमें जीवन में संतुलन, समर्पण और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी अजय रामदास जी, संजय सक्सेना, संजय वर्मा, सुधा शुक्ला, अंजली शुक्ला, प्रीति सक्सेना, अर्पणा मिश्रा, कीर्ति तिवारी, भारती वर्मा सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संत-महात्माओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया और शिव-शक्ति विवाह के दिव्य प्रसंग पर भक्तिमय वातावरण निर्मित हो गया। कार्यक्रम में जय हो फाउंडेशन द्वारा व्यवस्थापन सहयोग प्रदान किया गया तथा फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित निःशुल्क योग प्रशिक्षण शिविर में भी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अंत में तरुण तिवारी, रामकुमार चंदेर, विजय मते, कीर्ति तिवारी एवं शुभम शर्मा ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से अनुरोध किया कि शिव आराधन महोत्सव के अंतिम दिवस पर उपस्थित होकर भगवान शिव की आराधना का लाभ प्राप्त करें। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान एवं जय हो फाउंडेशन ने सभी श्रद्धालुओं से अंतिम दिवस में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की।